वजीराबाद में नहीं शुरू हुआ अमोनिया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, आतिशी ने मुख्य सचिव से चार दिन में मांगी रिपोर्ट
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दिल्ली की जल मंत्री आतिशी ने गुरुवार को वजीराबाद में अमोनिया उपचार संयंत्र स्थापित करने में देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने मुख्य सचिव को 15 जनवरी तक परियोजना के लिए निविदा जारी करने का निर्देश दिया। आतिशी ने कहा कि यमुना में अमोनिया का स्तर 2.8 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) तक पहुंच गया, जिससे चंद्रावल और वजीराबाद में जल उपचार संयंत्रों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई। बता दें कि, यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़ने पर भी पानी का उत्पादन न रुके ऐसे में ये प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें हो रही देरी से लाखों दिल्लीवासियों को समस्या होती है।
जलमंत्री ने इस बाबत मुख्य सचिव को लिखित निर्देश देते हुए कहा कि, एक जनवरी तक रिपोर्ट दें कि वजीराबाद में अमोनिया उपचार संयंत्र स्थापित करने में देरी क्यों हुई है? मुख्य सचिव एक टाइमलाइन के साथ बताएं कि ट्रीटमेंट प्लांट कब तक तैयार होगा और वे स्वयं व्यक्तिगत रूप से इस प्रोजेक्ट को मॉनिटर करें। वे सुनिश्चित करें कि इन-सीटू अमोनिया ट्रीटमेंट प्लांट के लिए टेंडर 15 जनवरी तक जारी हो जाए। आतिशी ने कहा कि जो प्रोजेक्ट 4-6 महीने के अंदर पूरा होना था, 9 महीने बीतने के बाद भी उसपर जमीनी स्तर पर कोई काम शुरू क्यों नहीं हुआ?
जल मंत्री आतिशी ने कहा कि, बुधवार को यमुना नदी में अमोनिया का स्तर 2.8 पीपीएम तक पहुंच गया। यमुना में अमोनिया के बढ़े हुए स्तर ने चंद्रावल और वजीराबाद में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के उत्पादन क्षमता को प्रभावित किया। इस कारण वजीराबाद और चंद्रावल प्लांट की उत्पादन क्षमता उनकी कुल क्षमता से लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो गई। इस कारण पानी का उत्पादन भी औसतन लगभग 35-40 फीसदी कम हो गया। उन्होंने कहा कि, इस समस्या के कारण दिल्ली के लगभग एक चौथाई हिस्से पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिससे सदर बाजार, सिविल लाइन्स, पुरानी दिल्ली, मुखर्जी नगर, बुराड़ी, पटेल नगर, राजिंदर नगर, करोल बाग, मजनू का टीला, आईएसबीटी, बरफखाना, बारा हिंदू राव, कमला नगर, रूप नगर जैसे घनी आबादी वाले इलाके प्रभावित हुए।




