हल्द्वानी: गौलापार स्टेडियम बचाने के नाम पर गौला से अवैध खनन, सिंचाई विभाग के तीन जेई और ठेकेदार पर मुकदमा
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हल्द्वानी। गौलापार स्थित अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की सुरक्षा के नाम पर गौला नदी से खनन चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस अवैध गतिविधि का भंडाफोड़ हाल ही में वन विभाग की जांच के दौरान ही हुआ, जिसके बाद सिंचाई विभाग के 3 कनिष्ठ अभियंताओं (JE) व एक ठेकेदार के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
हालांकि अब जाकर इस मामले पर विभागीय कार्रवाई भी शुरू हुई है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि खनन चोरी कब से चल रही थी और इस पर पहले किसी की नजर आखिर क्यों नहीं पड़ी?
स्टेडियम की सुरक्षा दीवार का कार्य बना अवैध खनन का ज़रिया
पिछली बरसातों में गौला नदी के कटाव के चलते गौलापार स्टेडियम को बड़ा खतरा भी पैदा हो गया था। इसके चलते सिंचाई विभाग को स्टेडियम की सुरक्षा के लिए 460 मीटर लंबी व 9 मीटर ऊंची सुरक्षा दीवार के निर्माण की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। लगभग 36 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस दीवार का निर्माण कार्य फरवरी 2025 से भी चल रहा है।
निर्माण सामग्री के तौर पर ठेकेदार ने कथित रूप से नदी से ही खनन सामग्री निकाली व उसे निर्माण में उपयोग भी किया। दो दिन पूर्व जब वन विभाग की टीम ने निरीक्षण के दौरान साइट पर खनन सामग्री की वैधता के दस्तावेज मांगे, तो कार्यदायी संस्था व ठेकेदार के पास कोई वैध कागजात ही नहीं पाए गए।
वन विभाग ने की कार्रवाई, दर्ज हुआ मामला
वन विभाग के डीएफओ हिमांशु बागरी (तराई पूर्वी) ने बताया,
“स्थल पर मौजूद सामग्री की जांच में स्पष्ट हुआ कि इसे गौला नदी से अवैध रूप से निकाला गया है। इसके आधार पर गौला रेंज में 3 जेई और 1 ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।”
अब तक 45 फीसदी कार्य पूरा, आगे की कार्रवाई लंबित
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता एम. खरे ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया,
“हमें 3 जेई और ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी मिली है। वर्तमान में सुरक्षा दीवार का करीब 45 फीसदी निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है। आगे की कार्रवाई उच्चाधिकारियों के निर्देश के अनुसार ही की जाएगी।”
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने निर्माण कार्यों की निगरानी और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। क्या सिंचाई विभाग को इस अवैध खनन की जानकारी नहीं थी? यदि थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या यह कार्य महज लापरवाही थी या इसके पीछे कोई संगठित मिलीभगत है?
अब निगाहें शासन व प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है या यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।




