उत्तराखंड में 13 संस्कृत ग्रामों का वर्चुअल शुभारंभ, CM धामी बोले – संस्कृत को पूजा-पाठ से आगे व्यवहार में अपनाएं
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ऋषिकेश के राजकीय प्राथमिक विद्यालय भोगपुर में आयोजित कार्यक्रम में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 13 जिलों के 13 आदर्श संस्कृत ग्रामों का वर्चुअल शुभारंभ भी किया। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी व केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस आयोजन में सीएम ने कहा कि संस्कृत भाषा केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहकर बोलचाल और दैनिक जीवन में भी शामिल होनी चाहिए।
सीएम धामी ने बताया कि संस्कृत भवन व प्राथमिक संस्कृत विद्यालय स्थापित भी किए जाएंगे, साथ ही एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन व प्रमुख स्थानों पर अब तक 5,000 संस्कृत नामों के बोर्ड भी लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के प्रयास भी हो रहे हैं।
आपदा राहत और पुनर्वास
धराली-हर्षिल आपदा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए सीएम ने बताया कि प्रभावितों को तत्काल 5 लाख रुपये की मदद भी दी जा रही है। आपदा आकलन के लिए राजस्व सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है जो एक सप्ताह में रिपोर्ट भी देगी।
रोजगार और कानून व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने बताया कि नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद 23,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी भी मिली है। राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य भी है। ऑपरेशन ‘कालनेमि’ के तहत सनातन धर्म को बदनाम करने वालों पर सख्त कार्रवाई भी जारी है।
शिक्षा में नई पहल
कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत ने घोषणा की कि अगले वर्ष से सभी संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों में एनसीसी, एनएसएस व स्काउट गाइड शुरू की जाएगी। साथ ही, भोगपुर महादेव खाले के ट्रीटमेंट के लिए 9 करोड़ रुपये स्वीकृत भी किए गए।
ये हैं 13 संस्कृत ग्राम
देहरादून – भोगपुर, टिहरी गढ़वाल – मुखेम, उत्तरकाशी – कोटगांव, रुद्रप्रयाग – बैंजी, चमोली – डिम्मर, पौड़ी गढ़वाल – गोदा, पिथौरागढ़ – उर्ग, अल्मोड़ा – जैंती पाण्डेकोटा, बागेश्वर – शेरी, चंपावत – खर्ककार्की, हरिद्वार – नूरपुर पंजनहेड़ी, नैनीताल – पांडे गांव और ऊधमसिंह नगर – नगला तराई।




