कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में GIS तकनीक से वन भूमि सीमांकन, डिजिटल रिकॉर्डिंग की तैयारी
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देहरादून: उत्तराखंड सरकार वन भूमि विवाद व सीमांकन को डिजिटल तरीके से सुलझाने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। इसकी शुरुआत कॉर्बेट व राजाजी टाइगर रिजर्व से होगी, जहां GIS तकनीक का उपयोग कर टाइगर रिजर्व की सीमाएं तय भी की जाएंगी। इसके बाद राज्य के सभी वन क्षेत्रों की सीमाओं को भी डिजिटल रूप से निर्धारित भी किया जाएगा।
इस पहल के तहत Precise Survey of Identified Boundary and Creation and Maintenance of an Enterprise Class Web/Cloud GIS Based Forest Land Decision Support System परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए आईटीआई लिमिटेड को कार्यदाई संस्थान नामित भी किया गया है। इसके माध्यम से वन क्षेत्र का तकनीकी सीमांकन चरणबद्ध तरीके से ही किया जाएगा।
प्रमुख वन संरक्षक हॉफ समीर सिन्हा ने कंपनी के जनरल मैनेजर को पत्र भेजकर Standard Operating Procedure (SOP) को अनुमोदित करने व कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि Preliminary Project Report (PPR) 15 दिनों के भीतर शासन को उपलब्ध भी कराई जाए व इसके बाद Detailed Project Report (DPR) तैयार की जाए, जिसमें तकनीकी और वित्तीय प्रस्ताव भी सम्मिलित होंगे।
परियोजना का मुख्य उद्देश्य है:
- राज्य के वन क्षेत्र की सटीक सीमाएं तय करना
- अतिक्रमण और भूमि विवाद को समाप्त करना
- GIS आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली के माध्यम से भूमि प्रबंधन को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना
यह परियोजना उत्तराखंड में पायलट मोड में शुरू भी की जा रही है। उपग्रह आधारित सर्वे से सीमाओं की सटीक पहचान भी संभव होगी और वन भूमि में चल रहे विकास कार्यों की मॉनिटरिंग भी आसान होगी।
परियोजना के पूरा होने के बाद उत्तराखंड उन राज्यों में शामिल भी होगा, जहां वन भूमि का पूरा रिकॉर्ड GIS आधारित वेब पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध भी होगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि वन भूमि प्रबंधन में तकनीकी दक्षता भी सुनिश्चित होगी।




