रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे निर्माण में मानकों की अनदेखी, स्थानीयों में गहरा आक्रोश
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रुद्रप्रयाग : चारधाम परियोजना के तहत रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे का निर्माण बीते 5-6 वर्षों से जारी है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस कार्य में न तो तय मानकों का पालन हो रहा है और न ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी रही है। तिलवाड़ा से सिल्ली तक के निर्माण कार्य में कटिंग की असमानता और अतिक्रमण को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
हाईवे के तिलवाड़ा क्षेत्र में जहाँ 14 मीटर कटिंग की जा रही है, वहीं कुछ ही किलोमीटर आगे सिल्ली में 24 मीटर कटिंग का कार्य किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार और एनएच विभाग की नीतियां स्पष्ट नहीं हैं और हाईवे कटिंग में कोई एकरूपता नहीं है।
सिल्ली निवासी देवी प्रसाद गोस्वामी ने आरोप लगाया कि,
“2013 की आपदा के बाद बड़ी मुश्किल से लोग अपने पैरों पर खड़े हो पाए थे, लेकिन अब नियमों की अनदेखी और मनमानी कटिंग ने सिल्ली बाजार को लगभग खत्म कर दिया है। तिलवाड़ा को बचा लिया गया, लेकिन सिल्ली को उजाड़ दिया गया।”
स्थानीयों ने आरोप लगाया कि जिन लोगों को भवन और भूमि का मुआवजा दिया गया है, वहाँ पर समय से अधिग्रहण नहीं किया गया। इससे हालात ये हो गए हैं कि कई लोग अब दोबारा उसी जमीन पर कब्जा कर अपने प्रतिष्ठान खड़े कर रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता हरीश गुंसाई ने इस मुद्दे पर कहा,
“चारधाम योजना बिना ज़मीनी निरीक्षण के बनाई गई है। एएसआई की रिपोर्ट तक योजना में नहीं जोड़ी गई। मुआवजा किसी और को मिला, और खेत किसी और का काट लिया गया। यह पूरी योजना अनियोजित है।”
स्थानीयों का यह भी आरोप है कि विभाग द्वारा कार्रवाई भी पक्षपातपूर्ण की जा रही है। जहाँ विभाग की पकड़ है, वहाँ तेजी से तोड़फोड़ हो रही है, लेकिन मुआवजा पाने वाले कुछ लोग अब भी अतिक्रमण कर रहे हैं और उन्हें कोई नहीं रोक रहा। ग्रामीणों और प्रभावितों ने सरकार और एनएच विभाग से मांग की है कि:
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कटिंग के मानक पूरे हाईवे पर एक समान लागू हों
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भूमि अधिग्रहण समय पर पूरा किया जाए
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अतिक्रमण पर निष्पक्ष कार्रवाई हो
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प्रभावितों को पारदर्शी तरीके से मुआवजा और पुनर्वास मिले




