उत्तराखंड की पहली एआई नीति जारी, गांव-गांव डिजिटल बदलाव की तैयारी
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उत्तराखंड सरकार ने राज्य की पहली एआई (Artificial Intelligence) नीति का ड्राफ्ट भी जारी कर दिया है। नीति का लक्ष्य शिक्षा, स्वास्थ्य, शासन, कृषि, जलवायु व आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में डिजिटल परिवर्तन लाना है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने इस ड्राफ्ट पर जनता से सुझाव भी मांगे हैं।
एआई नीति के मुख्य बिंदु:
- टेलीमेडिसिन, ई-लर्निंग जैसी सरकारी सेवाओं में एआई को जोड़ा जाएगा।
- दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों, बुजुर्ग व कमजोर समुदायों को बेहतर सेवाएँ मिलेंगी।
- पर्यटन, स्वास्थ्य, शहरी विकास, जलवायु और शिक्षा को प्राथमिकता मिलेगी।
- युवाओं के लिए एआई स्किलिंग, रोजगार और स्टार्टअप अवसर बढ़ेंगे।
- पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह एआई सिस्टम तैयार होंगे।
- हर विभाग में एआई पायलट प्रोजेक्ट चलाने के लिए एआई मिशन और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा।
2030 और 2047 के लक्ष्य:
- 2030 तक इंटरनेट उपलब्धता 100% और 2047 तक 130% करने का लक्ष्य।
- स्मार्टफोन उपयोग 65% से 90% और डिजिटल साक्षरता 40% से 80% तक बढ़ाई जाएगी।
- भारतनेट के जरिए सभी ग्राम पंचायतों में तेज इंटरनेट पहुंचाया जाएगा।
- एआई के लिए कंप्यूट क्षमता 775 TFLOPS से बढ़ाकर 2047 तक 7500 TFLOPS की जाएगी।
- राज्य में 2030 तक 3 और 2047 तक 7 एआई इनोवेशन सेंटर स्थापित होंगे।
आपदा प्रबंधन में एआई की बड़ी भूमिका:
- भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, ग्लेशियल लेक फटने जैसी घटनाओं का पहले से पता लगाने में मदद।
- सैटेलाइट व ड्रोन इमेज को एआई तुरंत विश्लेषित कर तेजी से राहत कार्य।
- पुल, सड़क और बांधों की एआई सेंसर से निरंतर निगरानी।
- एआई चैटबॉट आपदा के समय बहुभाषीय अलर्ट और जानकारी देंगे।
- गढ़वाली-कुमाऊंनी भाषा पहचान और स्पीच मॉडल भी विकसित किया जाएगा।
उत्तराखंड की नई एआई नीति राज्य को डिजिटल रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका असर शिक्षा से लेकर आपदा प्रबंधन तक हर क्षेत्र में ही दिखेगा।




