दिल्ली में बराबरी पर है बीजेपी-कांग्रेस, अब बढ़त की होड़; आप को खाता खुलने का इंतजार
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लोकसभा चुनावों के बीच दिल्ली में कांग्रेस और बीजेपी में दूसरे स्तर की भी सियासी जंग चल रही है। बीते 17 संसदीय चुनावों में दिल्ली से लोकसभा में जितने सांसद पहुंचे हैं, उनमें से बीजेपी और कांग्रेस के सांसदों की संख्या बराबर ही रही है। 112 लोकसभा सांसदों में से दोनों दलों के सांसदों की संख्या 54-54 ही है। दोनों दलों में होड़ अब एक-दूसरे से आगे निकलने की ही है। जिस दल के ज्यादा उम्मीदवार लोक सभा में पहुंचेंगे, उसको इस मामले में बढ़त भी हासिल होगी।
उधर, कांग्रेस के सामने बीते 10 सालों का सियासी सूखा खत्म करने की भी चुनौती है। 2009 के आम चुनावों के बाद कांग्रेस का एक भी उम्मीदवार दिल्ली से ही नहीं जीत सका है। वहीं, बीते दो चुनावों में आप का भी दिल्ली से खाता तक नहीं खुला है। जीतने की सूरत में आप दिल्ली से लोकसभा में पहला प्रतिनिधि भी भेजेगी। सीट शेयरिंग समझौते के तहत दिल्ली के सत्ता संग्राम में उतरी कांग्रेस और आप की कोशिश इस वक्त एक-दूसरे को सियासी ताकत देने की ही है। दरअसल, बीते 17 संसदीय चुनावों में दिल्ली ने 112 सांसद लोकसभा में भेजे हैं। 2009 तक इनकी संख्या 98 थी। उस वक्त दिल्ली ने कांग्रेस को 54 सांसद दिए थे, जबकि बीजेपी ने 40। इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस को बुरी तरह पटखनी दी। लगातार दो चुनावों में दिल्ली से कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका है। इससे उसके सांसदों की संख्या तो स्थिर रही, लेकिन बीजेपी के 54 सांसद लोकसभा तक पहुंचने में कामयाब रहे। मौजूदा लोकसभा चुनाव इस मायने में भी अहम है कि जिस भी दल का ज्यादा उम्मीदवार जीतेगा, उसको इस पैमाने बढ़त हासिल होगी। 1952 से 2019 तक बीजेपी कभी भी कांग्रेस से बराबरी नहीं कर सकी थी। 1999 के चुनाव में कांग्रेस से बीजेपी मात्र दो अंक पीछे थी। उस दौरान दिल्ली में कांग्रेस के 41 और बीजेपी के 39 सांसद बने थे। 2004 में भी दोनों दलों में आगे निकलने की होड़ थी, लेकिन चुनाव में कांग्रेस ने उलटफेर करके 6 सीट जीत ली और आंकड़ा कांग्रेस के पक्ष में झुक गया। 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने 7 सीटें जीतकर बीजेपी को एक बार फिर काफी पीछे कर दिया था। पिछले दोनों चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस का सफाया करके सभी सीटों पर जीत हासिल की और पिछले चुनाव में बीजेपी के नेताओं ने सांसद बनने के मामले में कांग्रेस की बराबरी कर ली थी। बीजेपी का गठन होने से पहले उसके नेता जनसंघ, भारतीय लोकदल और जनता पार्टी में रहकर चुनाव लड़े थे। बीजेपी के 6 नेता जनसंघ और 5 नेता भारतीय लोकदल और 1 नेता जनता पार्टी के टिकट पर उनके साथ समझौते के तहत चुनाव लड़ने पर सांसद बना था, वहीं 42 नेता बीजेपी के सांसद बन चुके है। किसान मजदूर प्रजा पार्टी और जनता दल का एक-एक सांसद बना है। वहीं, दो सांसद भारतीय लोकदल के अपने नेता बने है। पिछले दो लोकसभा चुनाव की तुलना में कांग्रेस इस बार बीजेपी को पटखनी में देने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इस मामले में कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी से भी गठबंधन कर लिया है। जबकि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में उसकी राजनीतिक जमीन छीन रखी है। 2019 के चुनावों में कांग्रेस 5 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी। जबकि आप दो सीटों पर ही रनर रही। बावजूद इसके कांग्रेस ने 4 सीटें आप को देकर समझौता किया है। इसमें दोनों दलों को अपना-अपना फायदा दिख रहा है। अगर गठबंधन को कामयाबी मिलती है तो कांग्रेस का 10 साल का सियासी सूखा खत्म होगा। वहीं, आप को दिल्ली से लोकसभा में खाता खुलेगा। बीते दो चुनावों में कांग्रेस और आप को बीजेपी ने करारी शिकस्त दी है।




