उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी से बढ़ा वनाग्नि का खतरा, गढ़वाल के जंगलों में तेजी से फैल रही आग
Deprecated: preg_split(): Passing null to parameter #3 ($limit) of type int is deprecated in /home/u948756791/domains/doondarshan.in/public_html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/post-functions.php on line 805
Deprecated: htmlspecialchars(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /home/u948756791/domains/doondarshan.in/public_html/wp-includes/formatting.php on line 4731
उत्तराखंड में इस बार शुरुआती महीनों में वनाग्नि की घटनाएं कम रहने से राहत भी महसूस कर रहा वन विभाग अब बढ़ते तापमान को लेकर चिंता में है। मई के अंतिम सप्ताह में गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग की घटनाओं में अचानक ही तेजी आई है, खासकर गढ़वाल क्षेत्र के कई वन प्रभाग सबसे अधिक प्रभावित भी नजर आ रहे हैं।
उत्तराखंड में हर साल 15 फरवरी से मानसून आने तक फॉरेस्ट फायर सीजन भी माना जाता है। इस दौरान जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी आम हो जाती हैं। इस बार सीजन शुरू होने से पहले आशंका भी जताई जा रही थी कि अधिक तापमान के कारण वनाग्नि की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। हालांकि फरवरी से अप्रैल तक हालात अपेक्षाकृत नियंत्रण में रहे व आग की घटनाएं पिछले वर्ष की तुलना में कम भी दर्ज की गईं।
लेकिन मई के अंतिम सप्ताह में मौसम में आए बदलाव व लगातार बढ़ते तापमान ने वन विभाग की चिंता भी बढ़ा दी है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 15 फरवरी से 21 मई तक राज्य में वनाग्नि की कुल 337 घटनाएं भी दर्ज की गई हैं, जिनमें लगभग 283 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित भी हुआ है।
बीते 5 से 6 दिनों में ही 54 नई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें करीब 55 हेक्टेयर जंगल प्रभावित भी हुए हैं। यह आंकड़े इस ओर संकेत कर रहे हैं कि तापमान बढ़ने के साथ जंगलों में आग फैलने का खतरा तेजी से भी बढ़ रहा है।
गढ़वाल क्षेत्र के टिहरी गढ़वाल, गोपेश्वर, नरेंद्र नगर वन प्रभाग, कालसी सोयल कंजर्वेशन क्षेत्र व केदारनाथ वन्यजीव अभ्यारण्य समेत कई वन प्रभाग सबसे ज्यादा प्रभावित भी बताए जा रहे हैं। इसके अलावा बद्रीनाथ डिवीजन में भी आग की घटनाएं भी सामने आई हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगलों में सूखी पत्तियों की अधिकता व लगातार बढ़ते तापमान के कारण आग तेजी से भी फैल रही है। पर्वतीय इलाकों में हल्की बूंदाबांदी जरूर भी हो रही है, लेकिन तेज हवाओं के चलते उसका असर सीमित ही रह गया है। हवाएं आग को एक स्थान से दूसरे स्थान तक तेजी से फैलाने का काम भी कर रही हैं।
वन विभाग ने सभी अधिकारियों व फील्ड स्टाफ को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश भी दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है व फायर वॉचर लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। विभाग ने रिस्पांस टाइम कम करने पर जोर भी दिया है, ताकि आग लगने की सूचना मिलते ही टीम तुरंत मौके पर भी पहुंच सके।
इसके साथ ही जिला प्रशासन, एसडीआरएफ व फायर सर्विस समेत अन्य विभागों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि वनाग्नि की घटनाओं पर तेजी से काबू भी पाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में लगने वाली आग केवल वन संपदा को नुकसान ही नहीं पहुंचाती, बल्कि इसका असर पर्यावरण, जैव विविधता, जल स्रोतों व वन्यजीवों पर भी पड़ता है। आग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है व कई दुर्लभ वनस्पतियां नष्ट भी हो जाती हैं।
वन विभाग ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि जंगलों के आसपास आग का इस्तेमाल बेहद सावधानी से करें व किसी भी आग की सूचना तुरंत विभाग को दें। मानसून आने तक जंगलों की सुरक्षा वन विभाग व प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी बनी रहेगी।
Deprecated: htmlspecialchars(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /home/u948756791/domains/doondarshan.in/public_html/wp-includes/formatting.php on line 4731




