अन्याय से न्याय तक: पी.आर.डी में प्रमाण पत्र जारी करने की मांग
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एक भाई ने प्रांतीय रक्षक दल के लिए प्रशिक्षण लिया। दूसरे भाई ने प्रशिक्षण लेने के बाद पी.आर.डी की ड्यूटी भी निभाई, इसके बावजूद नियमों के फेर में दोनों को पी.आर.डी जवान बनने से वंचित रखा गया। ऐसे में 72 साल के बुजुर्ग पिता ने आर.टी.आई के द्वारा बेटों को इंसाफ दिलाने का फैसला किया। अब 20 साल बाद दोनों भाइयों को पी.आर.डी में पहचान मिलने का रास्ता साफ हुआI बीती दो जुलाई को राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने आदेश जारी कर दिया है कि दोनों भाइयों के लिए पी.आर.डी का स्वयं सेवक प्रमाण पत्र जारी किया जाय। इस आदेश पर आने वाली 6 सितंबर तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश
दिये हैं।
यह प्रशिक्षण पुलिस विभाग की देखरेख में 27 जनवरी से 3 फरवरी 2004 के द्वारा हुआ था। प्रमाण पत्र न दाखिल करने के पीछे पी.आर.डी की ओर से आयोग को वजह बताई गई कि शिविर मात्र आठ दिन का हुआ था इसलिए प्रमाण पत्र जारी नही हुआ। पी.आर.डी एक्ट 1948 के अंतर्गत 22 दिन के अर्धसैन्य प्रशिक्षण और 15 दिन फिर से प्रशिक्षण के बाद ही प्रमाण पत्र दिए जाने का प्रावधान है। सभी पक्षों को सुनने के बाद सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश जारी किया। उन्होंने कहा की प्रशिक्षण लेने व ड्यूटी करने के बावजूद पीआरडी में स्वयंसेवक पंजीकृत न होना आश्चर्यजनक है। यह जिला युवा कल्याण और पीआरडी के स्तर पर बड़ी गलती दर्शाता है।
किसी प्रशिक्षण के बाद भी प्रमाण पत्र जारी न होना प्रशिक्षण नहीं होने के समान है। युवा कल्याण निदेशक और पीआरडी से अपेक्षा है कि इस तथ्य पर धियान पूर्वक संज्ञान लेकर किसी भी प्रशिक्षण के बाद उसका प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से जारी करने की व्यवस्था पर विचार करें।



