चमोली में आपदाओं का कहर: ज्योतिर्मठ क्षेत्र हुआ संवेदनशील, बर्फबारी और भूधंसाव से 5 सालों में तीन बड़ी आपदाएं
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चमोली जनपद ने पिछले 5 सालों में 3 बड़ी आपदाओं का सामना किया है, जिनमें से तीनों का केंद्र ज्योतिर्मठ क्षेत्र ही रहा है। ये आपदाएं हर बार वर्ष के शुरुआत में, यानि जनवरी व फरवरी में घटित हुई हैं, जिससे स्थानीय लोगों में खौफ भी बना हुआ है।
ज्योतिर्मठ, जो कि चीन सीमा क्षेत्र के नजदीक स्थित है, आपदाओं के लिहाज से अब बेहद संवेदनशील भी बनता जा रहा है। 7 फरवरी 2021 को ऋषिगंगा के उद्गम स्थल पर ग्लेशियर टूटने से भयंकर बाढ़ आई थी, जिसमें 206 लोग मारे गए थे। इस बाढ़ में ऋषि गंगा जल विद्युत परियोजना पूरी तरह बह गई, जबकि एनटीपीसी की तपोवन जल विद्युत परियोजना भी तहस-नहस हो गई। इस आपदा में परियोजना में काम कर रहे 139 श्रमिकों की मौत भी हुई थी।
इसके बाद, 2023 में 7 जनवरी को ज्योतिर्मठ क्षेत्र में भूधंसाव की एक और बड़ी घटना घटी, जिसने क्षेत्र को पूरी तरह प्रभावित भी किया। इसमें लगभग 300 परिवारों को विस्थापित होना पड़ा था और एक वर्ष तक लोग शिविरों में रहकर अपनी जिंदगी बिताने को मजबूर हो गए थे। इस आपदा के दौरान कई होटल व भवनों में झुकाव देखी गई थी, और जमीन में रहस्यमय तरीके से दरारें आ गई थीं।
अब, इस साल 28 फरवरी को माणा हिमस्खलन ने फिर से क्षेत्र में भय का माहौल बना दिया। 2 दिन की बर्फबारी के बाद माणा में हिमस्खलन की घटना सामने आई, जिसमें 8 श्रमिकों की मौत हो गई। माणा गांव के निवासी राजेंद्र सिंह का कहना है कि हिमस्खलन माणा क्षेत्र में सामान्य बात है, लेकिन इस बार हुई जनहानि ने लोगों को गहरे आघात भी पहुँचाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील है व बर्फबारी के चक्र में गड़बड़ी के कारण हिमस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं।
भूवैज्ञानिक एसपी सती का कहना है कि उन क्षेत्रों का चिन्हीकरण किया जाना चाहिए, जहां हिमस्खलन की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं। इन स्थानों पर मानवीय गतिविधियां सीमित करने व यहां कैंप लगाने की अनुमति न देने की आवश्यकता भी है।




