संसद में पीएम मोदी का बयान: महाकुंभ के माध्यम से पूरे विश्व ने भारत के विराट स्वरूप को देखा
लोकसभा में पीएम मोदी का संबोधन: महाकुंभ पर विशेष बयान
Deprecated: preg_split(): Passing null to parameter #3 ($limit) of type int is deprecated in /home/u948756791/domains/doondarshan.in/public_html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/post-functions.php on line 805
पीएम नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार को लोकसभा में महाकुंभ के आयोजन पर चर्चा की और इस सफल आयोजन में योगदान देने वालों का धन्यवाद किया।
पीएम मोदी ने कहा, “आज मैं इस सदन के माध्यम से देशवासियों को नमन करता हूं जिनकी मेहनत व प्रयासों से महाकुंभ का सफल आयोजन हुआ। इस सफलता में अनेक लोगों का योगदान है। मैं सभी कर्मयोगियों को सलाम भी करता हूं और पूरे देशभर के श्रद्धालुओं, उत्तर प्रदेश की जनता और विशेष रूप से प्रयागराज की जनता का आभार भी व्यक्त करता हूं।”
पीएम मोदी ने आगे कहा कि पिछले वर्ष अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह ने हमें यह एहसास दिलाया कि देश अगले 1000 वर्षों के लिए किस प्रकार तैयार हो रहा है। इस वर्ष महाकुंभ ने हमारी सोच को और भी दृढ़ किया है और देश की सामूहिक चेतना ने हमें अपनी ताकत का अहसास भी कराया है।
पीएम ने कहा, “मानव जीवन के इतिहास में कई ऐसे मोड़ आते हैं जो पीढ़ियों को दिशा प्रदान करते हैं।” उन्होंने महाकुंभ के आयोजन का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान लोग असुविधाओं की परवाह किए बिना इसमें शामिल भी हुए। पीएम मोदी ने कहा कि यह आयोजन हमारे संस्कारों के निरंतर आगे बढ़ने का प्रतीक भी है। आज भारत का युवा अपनी परंपराओं और आस्थाओं को गर्व के साथ अपना रहा है, और देश के रूप में हम बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित भी हो रहे हैं। हमारे विरासत से जुड़ने की परंपरा आज भारत की सबसे बड़ी पूंजी भी है।
पीएम ने यह भी कहा कि युवा पीढ़ी ने भी पूरी श्रद्धा से महाकुंभ में भाग लिया। उन्होंने महाकुंभ पर उठाए गए सवालों का जवाब दिया और कहा कि यह आयोजन देश के कोने-कोने में आध्यात्मिक चेतना का संचार करने वाला था। पीएम ने महाकुंभ को भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए कहा, “दुनिया ने महाकुंभ के माध्यम से भारत के विराट स्वरूप को देखा, और यह ‘सबका प्रयास’ का वास्तविक उदाहरण भी था।”
पीएम मोदी ने महाकुंभ को ‘एकता का अमृत’ बताते हुए कहा, “महाकुंभ से अनेक अमृत निकले हैं, और इनमें से एकता का अमृत सबसे पवित्र प्रसाद भी है। इस आयोजन में देश के हर हिस्से से लोग एकत्रित हुए, अपने ‘अहम्’ को त्यागकर ‘वयम्’ की भावना से प्रयागराज में जुटे।”
उन्होंने महाकुंभ को ऐतिहासिक अवसरों के समान बताया और स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण, गांधीजी के दांडी मार्च, और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के ‘दिल्ली चलो’ के नारे का उल्लेख भी किया। पीएम ने कहा, “मैं प्रयागराज महाकुंभ को भी एक ऐसे अहम पड़ाव के रूप में देखता हूं, जिसमें जागृत होते भारत का प्रतिबिंब भी दिखा।”
प्रधानमंत्री ने अपनी हालिया मॉरीशस यात्रा का भी जिक्र किया और बताया, “पिछले सप्ताह, मैंने त्रिवेणी का पवित्र जल मॉरीशस लेकर वहां के गंगा तालाब में प्रवाहित भी किया। वहां का माहौल उत्साह व आस्था से भरपूर था।” उन्होंने यह भी कहा कि महाकुंभ से प्रेरित होकर हमें नदी उत्सव की परंपरा को और विस्तारित करना चाहिए। इससे न केवल वर्तमान पीढ़ी को पानी के महत्व का अहसास होगा, बल्कि नदियों की सफाई व संरक्षण की दिशा में भी कदम उठाए जा सकेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महाकुंभ ने भारतीय युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं व आस्थाओं से जोड़ने का काम किया है और आज का युवा गर्व के साथ अपनी संस्कृति को अपनाने में भी आगे बढ़ रहा है।




