अंकिता भंडारी हत्याकांड: तीनों दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
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कोटद्वार : बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने आज शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने वनंत्रा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य व उसके 2 कर्मचारियों—सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—को हत्या, साक्ष्य मिटाने और छेड़खानी के अपराधों में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही तीनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना और अंकिता के परिजनों को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया गया है।
फैसले से पहले कोर्ट परिसर में तनाव
फैसला आने से पहले कोर्ट परिसर के बाहर भारी भीड़ जुट गई, जिसने बैरिकेडिंग तोड़कर भीतर घुसने की कोशिश भी की। पुलिस ने हालात संभालने के लिए देहरादून, हरिद्वार, टिहरी व उत्तरकाशी से फोर्स बुलाकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। 200 मीटर के दायरे में धारा 144 लागू रही और कई मजिस्ट्रेटों की तैनाती भी की गई।
दो साल आठ महीने तक चली सुनवाई
- 30 जनवरी 2023 को सुनवाई की शुरुआत हुई थी।
- एसआईटी ने 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।
- 47 गवाहों की गवाही के बाद कोर्ट ने 30 मई को फैसला सुनाया।
क्या है मामला?
- 18 सितंबर 2022 को अंकिता की हत्या कर शव को चीला नहर में फेंका गया।
- 22 सितंबर को मामला राजस्व पुलिस से रेगुलर पुलिस को सौंपा गया।
- 24 सितंबर को शव बरामद हुआ, पोस्टमार्टम एम्स ऋषिकेश में हुआ।
- मामले की जांच को डीआईजी स्तर की एसआईटी को सौंपा गया।
- 16 दिसंबर को हत्या, साक्ष्य छुपाने, छेड़खानी और अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल हुई।
जनआक्रोश और न्याय की प्रतीक्षा
यह मामला पूरे उत्तराखंड ही नहीं, देशभर में जनआक्रोश व न्याय की प्रतीक बन गया था। कोर्ट के इस फैसले से अंकिता को न्याय मिला है, लेकिन लोगों की भावनाएं अब भी उबाल पर हैं। परिजनों और आमजन ने फैसले का स्वागत किया, लेकिन फांसी की मांग भी दोहराई है।
यह फैसला केवल एक अपराध का अंत नहीं, बल्कि समाज को एक संदेश है— अपराध कितना भी प्रभावशाली हो, कानून से बच नहीं सकता।




