पंचायत चुनाव में भाजपा की भारी जीत – गांवों ने सेमीफाइनल में धामी सरकार पर फिर जताया भरोसा
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाजपा का जबरदस्त प्रदर्शन – 12 में से 10 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा
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देहरादून। उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के नतीजों ने सत्तारूढ़ बीजेपी को बड़ी राहत व उत्साह दिया है। प्रदेश की “छोटी सरकार” माने जाने वाली पंचायतों में बीजेपी ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 12 में से 10 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत भी दर्ज की है। हरिद्वार को छोड़कर बाकी सभी जिलों में पार्टी ने एकतरफा बढ़त भी बनाई है।
कुल 89 क्षेत्र पंचायतों में से 70 फीसदी से अधिक प्रमुख पद बीजेपी समर्थित प्रत्याशियों की झोली में ही गए। इस तरह शहरी निकाय चुनाव के बाद अब ग्रामीण मतदाताओं ने भी बीजेपी के पक्ष में विश्वास जताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले इसे “सेमीफाइनल” भी माना जा रहा था और परिणामों ने स्पष्ट रूप से बीजेपी के संगठन व सरकार के बीच बेहतर समन्वय को साबित किया है। खास बात यह रही कि राजधानी देहरादून की जिला पंचायत सीट जीतने के बावजूद मुख्य विपक्षी कांग्रेस, प्रदेश के अन्य जिलों में बीजेपी को कड़ी चुनौती नहीं दे पाई।
ग्रामीण मतदाताओं का मिला मजबूत समर्थन
उत्तराखंड में ग्रामीण मतदाता संख्याबल के लिहाज से सबसे बड़ा वर्ग भी माने जाते हैं और 70 विधानसभा सीटों में से आधे से अधिक सीटों पर इन्हीं का निर्णायक प्रभाव भी रहता है। पंचायत चुनावों के नतीजों ने सत्ताधारी दल के हौसले भी बुलंद कर दिए हैं। वर्ष 2022 में लगातार दूसरी बार प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई बीजेपी ने चुनावी वर्ष में ही हरिद्वार पंचायत चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी और लगभग ढाई वर्षों बाद बाकी 12 जिलों में भी ग्रामीण जनादेश को बीजेपी के पक्ष में ही माना जा रहा है।
इसके पहले जनवरी में हुए नगर निकाय चुनावों में भी बीजेपी ने 11 में से 10 नगर निगमों पर कब्जा भी जमाया था। नगर पालिका व नगर पंचायतों में भी पार्टी को मजबूती भी मिली थी।
गांवों में कैडर मजबूत करने की रणनीति सफल
बीजेपी ने इस बार संगठनात्मक रूप से गांवों में अपना कैडर मजबूत करने की रणनीति के तहत चुनाव भी लड़ा। नतीजा यह रहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष पदों पर दोबारा दबदबा कायम करने के साथ-साथ पार्टी ने क्षेत्र पंचायत प्रमुखों व ग्राम प्रधानों के अधिकांश पदों पर भी कब्जा जमाया।
क्षेत्र पंचायत प्रमुख के 70% व ग्राम प्रधानों की लगभग 85% सीटों पर बीजेपी समर्थित उम्मीदवार विजयी हुए।
कांग्रेस की ओर से एंटी इनकंबेंसी को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश भी की गई, लेकिन यह रणनीति ग्रामीण क्षेत्रों में असर ही नहीं दिखा पाई। कुल मिलाकर पंचायत चुनाव के परिणामों ने न केवल बीजेपी संगठन बल्कि सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व को भी नई ऊर्जा भी प्रदान की है।




