देहरादून: बांस की खेती और प्राकृतिक धागे पर नीति निर्माण की तैयारी, एफआरआई में हुई उच्चस्तरीय बैठक
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देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में आज सोमवार को केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड के कृषि एवं ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने भाग लिया। बैठक में बांस की प्रजातियों से प्राकृतिक धागा तैयार करने और उत्तराखंड में बांस की खेती को और अधिक प्रोत्साहित करने को लेकर गहन चर्चा भी हुई।
बांस आधारित कृषि मॉडल की दिशा में कदम
बैठक में वैज्ञानिकों से बांस से धागा उत्पादन की तकनीकी संभावनाओं पर चर्चा करते हुए मंत्री गणेश जोशी ने इसे किसानों के लिए वैकल्पिक आय के मजबूत स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बांस की खेती को बढ़ावा देकर न सिर्फ ग्रामीणों को स्थानीय रोजगार मिलेगा, बल्कि यह पलायन पर अंकुश लगाने में भी मददगार भी साबित हो सकता है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी बांस के साथ-साथ मदार जैसे बहुपयोगी वृक्षों पर भी कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से शोध को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए वानिकी उत्पादों को भी एकीकृत कृषि प्रणाली में शामिल किया जाए।
ओक टसर रेशम को मिल रही रफ्तार
बैठक के दौरान मंत्री जोशी ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि उत्तराखंड में ओक टसर रेशम उत्पादन तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि अब यह पूरी तरह इनडोर प्रणाली के तहत किया जा रहा है और टेंट आधारित व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू हो चुका है। मंत्री जोशी ने केंद्रीय मंत्री से रेशम उत्पादक किसानों से मिलने का अनुरोध किया, जिसे गिरिराज सिंह ने स्वीकार करते हुए आगामी समय में उत्तराखंड दौरे का आश्वासन दिया।
स्थानीय शाल से स्वागत
बैठक के अंत में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने उत्तराखंड में निर्मित ओक टसर रेशम की शाल भेंट कर केंद्रीय मंत्री का स्वागत किया। इस अवसर पर रेशम विभाग के निदेशक प्रदीप कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
इस बैठक के माध्यम से प्रदेश में बांस आधारित प्राकृतिक धागा उत्पादन, किसानों की आयवृद्धि और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण नीति निर्माण की नींव रखी गई है।




