वासू स्टील फैक्ट्री में करोड़ों की बिजली चोरी का पर्दाफाश, कर्मचारियों पर मुकदमा, मालिक पर सवाल बरकरार
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गुरुकुल नारसन स्थित उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के बिजलीघर में दर्ज की गई बड़ी बिजली चोरी की घटना ने विभाग और प्रशासन दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वासू स्टील फैक्ट्री के बिजली मीटरों से छेड़छाड़ कर करोड़ों की बिजली चोरी का खुलासा हुआ है। हालांकि मामले में फैक्ट्री के कर्मचारियों पर मुकदमा तो दर्ज हुआ है, लेकिन मालिक का नाम FIR से बाहर है, जिससे कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
क्या कर्मचारी अपने स्तर पर कर सकते हैं इतनी बड़ी चोरी?
सूत्रों के अनुसार, फैक्ट्री के दोनों मीटर—एक फैक्ट्री परिसर में और दूसरा संबंधित बिजलीघर में— दोनों में गड़बड़ी की गई थी। डबल मीटरिंग की व्यवस्था को दरकिनार करते हुए बिजली चोरी की गई। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इतने बड़े स्तर की चोरी बिना मालिक की जानकारी या संलिप्तता के संभव है?
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने UPCL और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि फैक्ट्री मालिक को भी आरोपी बनाया जाए और उस पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
यूपीसीएल को हो रहा सालाना करोड़ों का नुकसान
रुड़की डिवीजन में बिजली चोरी की समस्या कोई नई नहीं है। 2021-22 में 31.21%, 2022-23 में 31.09%, और 2023-24 में 31.50% वितरण हानियों (Distribution Losses) के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि यहाँ बड़े पैमाने पर बिजली चोरी हो रही है।
नियामक आयोग (Regulatory Commission) ने भी हालिया सुनवाई में इस पर चिंता जताई और UPCL को हाई लॉस फीडरों पर नियंत्रण की सख्त हिदायत दी।
वासू स्टील फैक्ट्री में मीटर से की गई छेड़छाड़ और दोनों स्तर पर निगरानी तंत्र की विफलता ने UPCL अधिकारियों की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। कई जानकार मानते हैं कि इतने बड़े पैमाने पर बिजली चोरी बिना विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है।
प्रदेश के आठ शहरों में सबसे ज्यादा बिजली चोरी
बिजली चोरी को लेकर उत्तराखंड के कई शहर बदनाम हो चुके हैं। एटी एंड सी (AT&C) लॉस के आंकड़ों के अनुसार:
| शहर | AT&C लॉस (%) |
|---|---|
| लंढौरा | 69.40% |
| जोशीमठ | 53.92% |
| खटीमा | 53.00% |
| मंगलौर | 47.62% |
| गदरपुर | 30.58% |
| जसपुर | 27.00% |
| लक्सर | 27.00% |
| सितारगंज | 27.25% |
इनमें लंढौरा और मंगलौर जैसे शहर बिजली चोरी के मामलों में लगातार टॉप पर बने हुए हैं।
आपको बताते चले की बिजली चोरी पर लगाम कसने के लिए UPCL के एमडी अनिल कुमार ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने आदेश दिए हैं कि रुड़की, भगवानपुर और आसपास के क्षेत्रों की सभी उच्च बिजली खपत वाली फैक्ट्रियों की एनर्जी अकाउंटिंग ऑडिट (Energy Accounting Audit) कराई जाए।
“इस ऑडिट से यह स्पष्ट होगा कि किस स्तर पर बिजली की खपत हो रही है और कहां गड़बड़ी की जा रही है। यदि किसी फैक्ट्री में अनियमितता पाई गई तो उसी अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” — अनिल कुमार, एमडी, UPCL
फैक्ट्री मालिक पर कार्रवाई की मांग तेज
स्थानीय लोगों और उद्योग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक फैक्ट्री मालिकों को जवाबदेह नहीं ठहराया जाएगा, तब तक बिजली चोरी जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी।
फिलहाल, वासू स्टील फैक्ट्री के मामले में मालिक को FIR से बाहर रखना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। उत्तराखंड में बिजली चोरी केवल तकनीकी या वाणिज्यिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक संपत्ति और कानून की खुली अवहेलना है। वासू स्टील फैक्ट्री का मामला सिर्फ एक उदाहरण है, लेकिन इससे पर्दाफाश होता है कि कैसे मिलिभगत से विभाग को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अब समय है कि जवाबदेही तय की जाए, और बड़े मगरमच्छों पर भी शिकंजा कसा जाए, न कि सिर्फ कर्मचारियों पर।




