सजावटी से व्यावसायिक तक: अब किसानों की कमाई बढ़ाएगा मोरपंखी पौधा
अब किसानों की आय बढ़ाएगा मोरपंखी पौधा, सुगंध व कॉस्मेटिक उद्योग में बढ़ी मांग
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देहरादून। अब तक घरों व कार्यालयों की शोभा बढ़ाने वाले मोरपंखी पौधे का इस्तेमाल भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी होने जा रहा है। सगंध पौध केंद्र, सेलाकुई पिछले 7-8 साल से मोरपंखी (वनस्पतिक नाम– Thuja compacta) की व्यावसायिक खेती पर शोध कर रहा है और अब उत्साहवर्धक नतीजे भी सामने आए हैं।
सदाबहार पिरामिडनुमा यह पौधा न केवल आकर्षक ही है, बल्कि इसकी पत्तियों में औषधीय व सुगंधित तत्व भी पाए जाते हैं। आसवन प्रक्रिया के बाद इससे तैयार तेल थुजोन, सबिनिन व फेनचोन जैसे घटकों से भरपूर ही होता है। यही वजह है कि इसका उपयोग परफ्यूम, एरोमा थैरेपी व कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण में तेजी से भी बढ़ रहा है।
सुगंध व एरोमा सेक्टर में बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र ने मोरपंखी की अलग-अलग प्रजातियों की नर्सरी तैयार कर शोध कार्य भी शुरू किया। इसमें प्रति हेक्टेयर उत्पादन, तेल की मात्रा और उसकी क्वालिटी का परीक्षण भी किया जा रहा है। लंबे शोध के बाद संस्थान को सकारात्मक नतीजे मिले हैं, जिससे बंजर भूमि पर भी मोरपंखी की व्यावसायिक खेती की संभावना भी मजबूत हुई है।




