माल्टा महोत्सव के बीच पहाड़ी माल्टा को बाजार नहीं मिल रहा
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पिथौरागढ़: उत्तराखंड में माल्टा महोत्सव तो आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन राज्य के पहाड़ी इलाकों में उत्पादित माल्टा अभी भी किसानों को उचित बाजार ही नहीं मिल पा रहा है। पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट, बेरीनाग व डीडीहाट में माल्टा के पेड़ फलों से लदे हुए हैं, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) केवल 7-10 रुपये प्रति किलो है व खरीद का कोई व्यवस्थित बंदोबस्त भी नहीं है।
किसानों का कहना है कि बंदरों से माल्टा को नुकसान भी हो रहा है। स्थानीय निवासी माधव सिंह धामी व कमलेश पंत के अनुसार, बाजार न मिलने और बंदरों के हमले से माल्टा की पैदावार भी बर्बाद हो रही है।
जिला उद्यान अधिकारी अभिनव कुमार ने बताया कि किसानों को माल्टा के पेड़ 50 प्रतिशत सब्सिडी पर भी दिए जा रहे हैं और सरकार बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास में ही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में माल्टा 10 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जाएगा, भविष्य में मूल्य बढ़ाया भी जाएगा।
माल्टा में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है और इसे जूस, जैम, मुरब्बा व स्क्वैश के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। विशेषज्ञ डॉक्टर आयुषी जोशी के अनुसार, यह फल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है व स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी भी है।
विशेषज्ञों और किसानों का कहना है कि यदि माल्टा को समय पर बाजार मिल जाए और बंदरों से सुरक्षा सुनिश्चित हो, तो पहाड़ी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत भी हो सकती है। फिलहाल उत्तराखंड का माल्टा बाजार में पंजाब के किन्नू से भी पीछे है, जबकि पौष्टिकता में माल्टा कहीं आगे भी है।
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