विकास प्राधिकरणों की कार्यशैली पर जनता का फूटा गुस्सा, भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप तेज
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हल्द्वानी। जिला विकास प्राधिकरण हो या क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण—दोनों की कार्यशैली से आम जनता, जनप्रतिनिधि व सामाजिक संगठन लगातार ही नाराज़ हैं। लोगों का कहना है कि प्राधिकरण भारी भरकम शुल्क लेकर नक्शा तो पास कर देता है, लेकिन निर्माण शुरू होते ही नोटिस भेजकर काम ही रुकवा देता है। इससे अधिकारियों व अभियंताओं की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठ रहे हैं और भ्रष्टाचार के आरोप गहराते ही जा रहे हैं।
“नक्शा पास करने के बाद उसी को अवैध बता दिया जाता है”
निलियम कॉलोनी के मोहन सिंह नेगी कहते हैं, “अगर प्राधिकरण नक्शा स्वीकृत कर चुका है तो कुछ माह बाद वही नक्शा अवैध कैसे हो जाता है? यह कार्यप्रणाली संदिग्ध है और इससे लोगों का मानसिक व आर्थिक शोषण भी होता है। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।”
“जनता नहीं, गलती प्राधिकरण की—तकनीकी दिक्कतें समय पर क्यों नहीं बताई जातीं?”
ईको टाउन के दीपेश श्रीवास्तव का कहना है कि आम नागरिक तकनीकी जानकार ही नहीं होता। “प्राधिकरण मोटी फीस भी लेता है, लेकिन निर्माण के दौरान आने वाली तकनीकी बारीकियां नहीं बताता। छोटे-छोटे अंतर पर पूरा निर्माण अवैध ही करार दे दिया जाता है। आखिर शुल्क की भारी राशि का उपयोग किस पर होता है—यह सार्वजनिक भी होना चाहिए।”
“शुरू में रोक क्यों नहीं? आधा घर बनने पर नोटिस भेजते हैं”
हल्द्वानी के विजय पाल का कहना है, “अगर कोई अवैध निर्माण है तो इंजीनियर शुरू में ही साइट पर जाकर आखिर रोक क्यों नहीं लगा देते? आधा घर बनने के बाद ही नोटिस भेजा जाता है और पूरा बन जाने पर तोड़फोड़ की जाती है। जिला पंचायत नक्शा पास कर दे तो प्राधिकरण बार-बार क्यों परेशान कर रहा है?”
“गरीब की नहीं सुनवाई, पहुंच वालों के नक्शे तुरंत पास”
अरशद अली ने कहा कि “प्राधिकरण में आम आदमी की कोई सुनवाई ही नहीं है। गरीब अपनी टपकती छत ठीक नहीं करा सकता, जबकि पहुँच वालों के नक्शे तत्काल स्वीकृत भी हो जाते हैं। पत्रकार से मारपीट के बाद ऊंचापुल में तोड़ा गया अवैध निर्माण दिखाता है कि किस तरह सियासी शह पर अवैध निर्माण फल-फूल भी रहे हैं।”
जनता की मांग:
- पारदर्शी प्रणाली लागू की जाए
- नक्शा पास होने के बाद किसी भी स्तर पर मनमानी रोकें
- जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय हो
- नियमित साइट निरीक्षण अनिवार्य किया जाए
लोगों का मत है कि अगर प्राधिकरणों की कार्यशैली में सुधार नहीं आया तो विकास के बजाय अव्यवस्था ही बढ़ती भी रहेगी।




