उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में बैंकों से ऋण लेने में कमी, सरकार ने सीडी रेशियो सुधार के लिए जारी किए निर्देश
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उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में जितनी धनराशि बैंकों में जमा कर रहे हैं, उसके अनुपात में वे ऋण नहीं ले रहे हैं। ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, चंपावत, नैनीताल जिलों की तुलना में राज्य के छह पर्वतीय जिलों के लोग ऋण लेने के मामले में काफी पीछे हैं। इन जिलों में लोगों को 66 से 76 फीसदी पैसा बैंकों में ही जमा रह जाता है और उसका वे अपने स्वरोजगार, कारोबार, सुविधाएं और संसाधन जुटाने में नहीं कर पाते हैं।
इन पर्वतीय जिलों में 40 फीसदी से भी कम ऋण जमा अनुपात होने से सरकार भी चिंतित है, इसलिए उसने कम सीडी अनुपात के कारणों की पहचान करने के निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिव (वित्त) आनंद बर्द्धन के मुताबिक, राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति में सभी बैंकों को सीडी रेशो में सुधार करने के लिए कहा गया है। सीडी रेशियो यह दर्शाता है कि बैंक अपने द्वारा निर्धारित जमा धनराशियों में से कितना उधार देता है।
बहुत कम अनुपात यह संकेत देता है कि बैंक अपने ढांचे का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। यानी पर्वतीय क्षेत्रों में बैंकों से और अधिक सक्रियता दिखाने की अपेक्षा है, ताकि उसका कारोबार बढे़ और साथ ही स्थानीय लोग बैंकों से ऋण योजनाओं का लाभ लेकर अपने जीवन स्तर पर में सुधार लाने का प्रयास करें।
राज्य का कुल ऋण जमा अनुपात (सीडी रेशियो) पिछले दो वर्षों से 54 फीसदी पर स्थिर है। इसमें से सबसे अधिक सीडी रेशियो 110 फीसदी ऊधमसिंह नगर जिले का है, जबकि 93 फीसदी चंपावत, 71 फीसदी हरिद्वार, 55 फीसदी नैनीताल, 51 फीसदी उत्तरकाशी, 45 फीसदी चमोली और 41 फीसदी देहरादून जिले का है।
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के कार्यवृत्त के मुताबिक, एसीएस ने बैंकों को कम सीडी अनुपात के कारणों पहचान करने, कम सीडी अनुपात वाले जिलों के जिला प्रबंधक से रिपोर्ट लेने, अग्रणी जिला प्रबंधक डीएलआरसी की बैठक में ऋण जमा अनुपात बढ़ाने के विषय में चर्चा करने और सेक्टर वाइज डेटा एसएलबीसी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।




