उत्तराखंड में लेखपालों का तीन दिवसीय कार्य बहिष्कार शुरू, संसाधनों की कमी और सुरक्षा को लेकर उठाई आवाज
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हल्द्वानी। उत्तराखंड लेखपाल संघ के प्रांतीय आह्वान पर जिलेभर के लेखपालों ने 3 दिवसीय कार्य बहिष्कार भी शुरू कर दिया है। इस दौरान लेखपालों ने तहसील परिसरों में धरना प्रदर्शन कर सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। उनकी प्रमुख मांगें—संसाधनों की कमी, तकनीकी सहयोग व कार्य के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करना रही हैं।
खतौनी अंश निर्धारण में तकनीकी संसाधनों की कमी से नाराज
धरना स्थल पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि खातेदारों के अंश निर्धारण के लिए राजस्व उपनिरीक्षकों को पर्याप्त तकनीकी संसाधन जैसे लैपटॉप व इंटरनेट उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। इससे कार्य में अनावश्यक देरी और त्रुटियों की संभावना भी बढ़ रही है।
लेखपालों ने मांग की है कि:
- अंश निर्धारण के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी खातेदार की हो
- प्रक्रिया के लिए पर्याप्त समय दिया जाए
- अत्यधिक खरीद-फरोख्त वाले खातों के लिए खातेदारों को पूर्व सूचना (नोटिस) दी जाए
- मानव-त्रुटियों पर दंड नहीं, सुरक्षा और संरक्षण मिले
संघ के पदाधिकारियों ने सरकार को चेताया
धरना प्रदर्शन में लेखपाल संघ के नैनीताल जिलाध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा, जिला मंत्री आशुतोष चंद्र, मनोज रावत, लक्ष्मीनारायण यादव, अरुण, संजय, डीएस पंचपाल समेत हल्द्वानी, कालाढूंगी, रामनगर व लालकुआं के लेखपाल बड़ी संख्या में शामिल भी हुए।

संघ के प्रदेश महामंत्री तारा चंद्र घिल्डियाल ने कहा,
“सरकार यह समझे कि खातेदारों के पुराने भू-अभिलेख और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराना उसका दायित्व है, न कि लेखपालों का। कार्य के दबाव में अनजाने में होने वाली गलतियों पर लेखपालों को दंडित करना अनुचित है। किसी भी हालत में लेखपालों का उत्पीड़न अब बिलकुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
कार्य बहिष्कार से राजस्व कार्यों पर असर
3 दिवसीय कार्य बहिष्कार के चलते तहसीलों में अंश निर्धारण, नामांतरण व खतौनी संबंधित कार्य प्रभावित हो गए हैं। यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया, तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी भी संघ ने दी है।




