उत्तराखंड में बाहरी राज्यों के वाहनों के प्रवेश पर महंगा होगा सफर, ग्रीन सेस बढ़ा
नई व्यवस्था 15 जून से लागू, फास्टैग से कटेगा शुल्क
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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के निजी व व्यावसायिक वाहनों पर ग्रीन सेस की दरों में 28 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी को भी मंजूरी दे दी है। यह फैसला राज्य कैबिनेट की हालिया बैठक में लिया गया। नई दरें 15 जून से लागू होंगी, जिसके तहत अब राज्य में प्रवेश करना महंगा भी हो जाएगा।
अब तक केवल व्यावसायिक वाहनों से ग्रीन सेस वसूला जा रहा था, लेकिन अब 15 जून से बाहरी राज्यों के निजी वाहनों पर भी यह शुल्क लागू भी होगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड में पंजीकृत वाहनों से ग्रीन सेस नहीं लिया जाएगा।
कैसे होगी वसूली?
ग्रीन सेस की वसूली फास्टैग के जरिए ही की जाएगी। इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों की मदद से ही ली जाएगी, जो वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन कर सीधे उनके फास्टैग खाते से सेस की राशि भी काटेंगे। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सिस्टम इंटीग्रेटर का चयन भी हो चुका है और अब नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वाहन सॉफ्टवेयर के साथ इंटीग्रेशन प्रक्रिया भी चल रही है। एक महीने के भीतर यह व्यवस्था पूरी तरह से लागू भी हो जाएगी।
नई दरें क्या होंगी?
| वाहन श्रेणी | ग्रीन सेस (रु.) |
|---|---|
| भारी वाहन (3 एक्सल) | 450 |
| भारी वाहन (4-6 एक्सल) | 600 |
| 7 एक्सल या उससे अधिक | 700 |
| मध्यम/भारी माल वाहन (7.5-18.5 टन) | 250 |
| हल्के माल वाहन (3-7.5 टन) | 120 |
| डिलीवरी वैन (3 टन तक) | 80 |
| भारी निर्माण उपकरण वाहन | 250 |
| बस (12 सीट से अधिक) | 140 |
| मोटर कैब, मैक्सी कैब, पैसेंजर कार | 80 |
नोट: प्रत्येक प्रवेश पर शुल्क फास्टैग खाते से स्वतः कटेगा।
कौन होंगे छूट के हकदार?
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV) व दोपहिया वाहन – इन पर कोई ग्रीन सेस नहीं लगेगा।
- उत्तराखंड में पंजीकृत वाहन – इनसे भी कोई ग्रीन सेस नहीं वसूला जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह कदम राज्य के पर्यावरण संरक्षण व सड़क उपयोग में संतुलन लाने के लिए उठाया गया है। नई व्यवस्था से राजस्व में भी इजाफा होने की उम्मीद भी है।




