उत्तराखंड निकाय चुनाव: निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस के लिए बन सकते हैं सिरदर्द, कई मुकाबले होंगे दिलचस्प
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प्रदेश के निकाय चुनाव में इस बार निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस की स्थिति को चुनौती दे सकते हैं। कई नगर निकायों में दिलचस्प मुकाबला होने वाला है, जिनकी परिणामों पर नजर सबकी रहेगी। 25 जनवरी को मतपेटी से प्रत्याशियों के भविष्य का खुलासा होगा, लेकिन दोनों प्रमुख दलों के नेता अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
नगर निगम रुड़की, श्रीनगर और ऋषिकेश सहित कई नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में इस बार मुकाबला काफी कड़ा होने जा रहा है। खासकर नगर पालिका मसूरी, बाड़ाहाट (उत्तरकाशी) जैसी जगहों पर निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस के लिए चिंता का कारण बन गए हैं। कुमाऊं क्षेत्र के कई निकायों में भी मुकाबला बेहद दिलचस्प रहेगा।
अगर 2018 के चुनावों पर नजर डालें, तो 82 नगर निकायों में से 24 में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी। वहीं, कोटद्वार और ऋषिकेश जैसे नगर निगमों में निर्दलीय प्रत्याशी दूसरे नंबर पर थे। 39 नगर पालिकाओं में से 15 में निर्दलीय प्रत्याशी ने दूसरे स्थान पर कब्जा किया था। 38 नगर पंचायतों में से 8 में अध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने मजबूत चुनौती दी थी।
पिरान कलियर, घनसाली, महुआ डाबरा हरिपुरा, देवप्रयाग, और टिहरी जैसे नगरों में भाजपा और कांग्रेस के बजाय निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच चुनावी संघर्ष हुआ था, जिसमें जीत-हार का फैसला निर्दलीय उम्मीदवारों के पक्ष में रहा। इस बार भी यही संभावना जताई जा रही है कि कई जगह निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।




