उत्तराखंड: एकल अभिभावकों और शहीदों की विधवाओं को अनिवार्य तबादले से छूट, तबादला सीमा भी समाप्त
Deprecated: preg_split(): Passing null to parameter #3 ($limit) of type int is deprecated in /home/u948756791/domains/doondarshan.in/public_html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/post-functions.php on line 805
देहरादून – उत्तराखंड सरकार ने तबादला नीति में बड़ा बदलाव करते हुए एकल अभिभावकों और बलिदानियों (शहीदों) की विधवाओं को दुर्गम क्षेत्रों में अनिवार्य तबादले से छूट देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही पात्रता सूची में शामिल कर्मचारियों के तबादलों की अधिकतम सीमा भी समाप्त कर दी गई है। इस संबंध में शासन ने औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
दुर्गम से सुगम और सुगम से दुर्गम में होंगे संतुलित तबादले
शिक्षकों और अन्य कार्मिकों के स्थानांतरण से जुड़े इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दुर्गम से सुगम क्षेत्रों में उतनी ही संख्या में तबादले किए जाएंगे, जितने तबादले सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में किए जाएंगे। इसका उद्देश्य व्यवस्था में संतुलन बनाए रखना है।
प्रतिस्थानी व्यवस्था अनिवार्य, तभी होगा कार्यमुक्त
अपर सचिव ललित मोहन रयाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, किसी भी कार्मिक को तबादला आदेश जारी करने से पहले प्रतिस्थानी (विकल्पी कर्मचारी) की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी को तब तक कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा, जब तक प्रतिस्थानी कर्मचारी कार्यभार ग्रहण करने के लिए वहां उपस्थित न हो।
दाम्पत्य नीति, सेवा अवधि और पदों की उपलब्धता पर भी रहेगा ध्यान
दाम्पत्य नीति के तहत आने वाले कर्मचारियों के तबादले करते समय वरिष्ठता, दुर्गम क्षेत्रों में की गई सेवा, और रिक्त पदों की उपलब्धता को ध्यान में रखा जाएगा। आदेश में यह भी उल्लेख है कि अनुरोध के आधार पर किए गए तबादलों पर कर्मचारी को तबादला भत्ता नहीं दिया जाएगा।
तबादलों के लिए तय समय सारिणी का होगा पालन
शासन ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि तबादला प्रक्रिया के दौरान तय समय सारिणी का सख्ती से पालन किया जाए, ताकि पारदर्शिता और प्रक्रिया की गंभीरता बनी रहे।




