देवभूमि उद्यमिता योजना: युवा सपनों को दे रही नई उड़ान, 965 छात्रों ने खड़ा किया अपना व्यवसाय
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देहरादून – उत्तराखंड की देवभूमि उद्यमिता योजना राज्य के युवाओं के सपनों को नए पंख दे रही है। उच्च शिक्षा विभाग की इस अभिनव पहल ने सरकारी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राओं को न केवल व्यावसायिक सोच दी है, बल्कि उन्हें रोजगार सृजक के रूप में भी खड़ा किया है।
अब तक 26247 छात्र-छात्राओं ने इस योजना में पंजीकरण भी कराया है, जबकि 965 छात्रों ने प्रशिक्षण लेकर अपने उद्यम स्थापित किए हैं। इनमें से 303 व्यवसाय मुनाफे की राह पर हैं, और इनके 25 उत्पाद अमेजन, फ्लिपकार्ट और मीशो जैसे प्लेटफार्मों पर बिक रहे हैं।
नए भारत की ओर कदम
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शुरू की गई यह योजना 124 उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यरत भी है। यहां देवभूमि उद्यमिता केंद्र स्थापित कर छात्रों को स्टार्टअप, मार्केटिंग, वित्तीय योजना और ब्रांडिंग जैसे व्यावसायिक कौशल सिखाए भी जा रहे हैं।
योजना के अंतर्गत:
- 14260 छात्रों ने दो दिवसीय बूट कैंप में भाग लिया
- 8721 छात्रों ने 12 दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) से प्रशिक्षण प्राप्त किया
- 1132 छात्रों ने “उद्यम आधार” के तहत व्यवसाय पंजीकृत किए
रोजगार से आगे, रोजगारदाता बन रहे युवा
योजना के तहत हर साल 20 नवाचार आधारित आइडिया को ₹75,000 तक की सीड फंडिंग भी दी जाती है। अब तक कई छात्रों को यह मदद भी मिल चुकी है, जिससे वे न केवल खुद को खड़ा कर पाए हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं।
“हर्बल हर्ट” की प्रेरक कहानी
अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया निवासी दीपक सिंह नेगी ने स्थानीय फलों से रेडी-टू-ड्रिंक जूस बनाने का विचार भी प्रस्तुत किया। योजना से उन्हें ₹75,000 की सीड फंडिंग, साथ ही पैकेजिंग, ब्रांडिंग व मेंटरिंग का सहयोग मिला। आज उनका ब्रांड “हर्बल हर्ट” एक सफल उद्यम है और उन्होंने 3 अन्य युवाओं को भी रोजगार दिया है।
सरकार का लक्ष्य – शिक्षा से उद्यमिता की ओर
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा,
“देवभूमि उद्यमिता योजना युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब हमारे युवा नौकरी ढूंढने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बन रहे हैं। यह योजना साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और संसाधनों से हमारे छात्र वैश्विक स्तर पर पहचान बना सकते हैं।”
यह योजना न केवल उत्तराखंड की शैक्षिक नीति का विस्तार है, बल्कि राज्य के आर्थिक विकास में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को सशक्त कर रही है।




