रुद्रप्रयाग: बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिरोबगड़ में भूस्खलन और बार-बार लगने वाले जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। करीब छह दशक से रुद्रप्रयाग और चमोली के लोगों के साथ ही चारधाम यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बने इस संवेदनशील क्षेत्र के विकल्प के रूप में कालियासौड़–खांकरा बाईपास का निर्माण तेजी से आगे बढ़ गया है। करीब 126 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस परियोजना को मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

भूस्खलन और जाम से मिलेगी राहत

बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सिरोबगड़ में पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने के कारण अक्सर यातायात बाधित हो जाता है। बरसात के दौरान समस्या और गंभीर हो जाती है। वहीं, चारधाम यात्रा के समय वाहनों का दबाव बढ़ने से यात्रियों और स्थानीय लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है।

कालियासौड़–खांकरा बाईपास तैयार होने के बाद इस संवेदनशील क्षेत्र के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। इससे बदरीनाथ और केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही स्थानीय लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

तीन पुलों का हो रहा निर्माण

चारधाम परियोजना के तहत करीब 3.22 किलोमीटर लंबे कालियासौड़–खांकरा बाईपास का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना में अलकनंदा नदी पर दो पुल और एक नाले पर पुल बनाया जाना है। इन पुलों के स्पान क्रमशः 182 मीटर, 189 मीटर और 258 मीटर निर्धारित हैं।

परियोजना के तहत एक पुल का निर्माण तकनीकी खामी के कारण पिछले चार साल से अटका हुआ था। अब इस पुल का निर्माण पूरा हो गया है, जिससे परियोजना के काम में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

अधीक्षण अभियंता अरुण कुमार पांडे के अनुसार, बाईपास का निर्माण सीमेंट-कंक्रीट से किया जा रहा है और इसे मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि मार्ग का पूरा लाभ तभी मिल पाएगा, जब इससे जुड़े तीनों पुलों का निर्माण भी पूरा हो जाएगा।

वहीं, पूर्व प्रधान विमल सिंह का कहना है कि बाईपास बनने से बदरीनाथ और केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी। साथ ही रुद्रप्रयाग और चमोली के लोगों को बार-बार लगने वाले जाम और यातायात बाधित होने की समस्या से भी काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है।

चारधाम यात्रियों के लिए अहम परियोजना

कालियासौड़–खांकरा बाईपास को सिरोबगड़ की पुरानी समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। हालांकि, यात्रियों को इसका वास्तविक लाभ बाईपास और इससे जुड़े सभी पुलों का निर्माण पूरा होने के बाद ही मिल सकेगा।

अब निर्माण एजेंसियों के सामने परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने की चुनौती है। यदि मई 2027 तक बाईपास यातायात के लिए तैयार हो जाता है, तो आने वाली चारधाम यात्राओं में सिरोबगड़ के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है।