भाजपा नेता और पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.) ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए डोईवाला सीट को चुना है। सैन्य बहुल क्षेत्र होने के कारण उन्हें इस सीट से उम्मीदें हैं। हालांकि अभी उनका टिकट तय नहीं हुआ है, लेकिन कर्नल कोठियाल ने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है।
एक साक्षात्कार में कर्नल कोठियाल ने राजनीतिक और सैनिकों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भाजपा में क्षमता और आवश्यकता के अनुसार जिम्मेदारी देने की व्यवस्था है और वह राजनीतिक तरीके से जिम्मेदारी लेने के लिए इच्छुक हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने डोईवाला विधानसभा क्षेत्र को अपनी तैयारी के लिए चुना है।
कर्नल कोठियाल ने बताया कि डोईवाला में बड़ी संख्या में पूर्व और वर्तमान सैनिकों के परिवार हैं। उनके यूथ फाउंडेशन के माध्यम से यहां से करीब 1,450 युवा सेना में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी तैयारी शुरू कर दी है और आगे पार्टी जैसा उचित समझेगी, उसी के अनुसार काम करेंगे।
उन्होंने बताया कि केदारनाथ पुनर्निर्माण योजना के दौरान कुछ अभिभावक उनके पास आए और अपने बच्चों को सेना में भर्ती कराने की इच्छा जताई। इसके बाद उन्होंने यूथ फाउंडेशन का गठन कर युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया। उनके मुताबिक, आज यूथ फाउंडेशन के माध्यम से प्रशिक्षण लेकर करीब 15 से 16 हजार युवा सेना में शामिल हो चुके हैं।
अग्निवीर योजना पर कर्नल कोठियाल ने कहा कि यह भारतीय सेना का फैसला है, जिसे सोच-समझकर लिया गया है। हालांकि कुछ लोगों ने इस योजना को लेकर भ्रांतियां फैलाई हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने मुख्यमंत्री से बात की और चार साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों को रोजगार दिलाने का अनुरोध किया।
उनका कहना है कि प्रशिक्षण और अनुभव लेकर आने वाले अग्निवीरों को अर्धसैनिक बलों या अन्य सरकारी विभागों में रोजगार के अवसर दिए जाएं तो इससे योजना को लेकर फैली भ्रांतियां दूर करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने अग्निवीरों के रोजगार के लिए अग्निवीर रोजगार सेल का गठन भी कर दिया है।
पहाड़ और मैदान से जुड़े सवाल पर कर्नल कोठियाल ने कहा कि उनके लिए पहाड़ पहले है। वहीं, सेना से सेवानिवृत्ति के बाद लिए गए सबसे मुश्किल फैसले के बारे में उन्होंने बताया कि उन्होंने सेना में मिले अनुभव को समाज की सेवा में लगाने का निर्णय लिया था। हालांकि शुरुआत में माहौल में बदलाव देखकर उन्हें एक बार लगा कि उनका फैसला सही था या नहीं, लेकिन बाद में परिस्थितियां ठीक होती चली गईं।
