मां, भाई और गर्भवती भाभी की हत्या के दोषी को फांसी की सजा बरकरार
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टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड के टिहरी जिले में हुए त्रिपल मर्डर केस में अदालत ने दोषी को मृत्युदंड की सजा बरकरार ही रखी है। टिहरी गढ़वाल में अपर सत्र न्यायाधीश नसीम अहमद की अदालत ने मां, भाई व गर्भवती भाभी की निर्मम हत्या के आरोपी को फांसी की सजा सुनाते हुए अपने पूर्व फैसले को कायम भी रखा है।
गौरतलब है कि इसी अदालत ने 24 अगस्त 2021 को भी आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामले में पुनः सुनवाई के निर्देश दिए थे। दोबारा सुनवाई के दौरान मेडिकल परीक्षण और अन्य पहलुओं की जांच के बाद अदालत ने सजा को बरकरार रखा।
2014 में हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात
मामला 13 दिसंबर 2014 का है। गजा तहसील के गुमाल गांव निवासी राम सिंह पंवार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उनके पुत्र संजय सिंह ने मामूली विवाद के बाद अपनी मां मीना देवी, भाई सुरेंद्र सिंह और गर्भवती भाभी कांता देवी की तलवार से बेरहमी से हत्या कर दी थी।
आरोप के अनुसार संजय सिंह ने पहले जंगल में अपनी भाभी की हत्या की और उसके बाद घर लौटकर अपने भाई और मां को भी मौत के घाट उतार दिया। घटना के समय उसका पिता बाजार गया हुआ था, अन्यथा वह उन्हें भी मारने की कोशिश कर रहा था।
पुलिस ने आंसू गैस छोड़कर किया था गिरफ्तार
घटना के बाद आरोपी ने अपने पिता की लाइसेंसी बंदूक लेकर खुद को एक कमरे में बंद भी कर लिया था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आंसू गैस का इस्तेमाल भी किया और उसे गिरफ्तार भी कर लिया। इसके बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में आरोप पत्र अदालत में दाखिल भी किया।
हाईकोर्ट के आदेश पर दोबारा हुई सुनवाई
मृत्युदंड के फैसले को पुष्टि के लिए नैनीताल स्थित हाईकोर्ट में भेजा गया था, जबकि आरोपी ने भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल भी की थी। 10 मई 2022 को हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए मामले की दोबारा सुनवाई के निर्देश भी दिए थे।
एडीजीसी बेणीमाधव शाह के अनुसार आरोपी का मानसिक परीक्षण भी कराया गया, जिसमें चिकित्सकों ने उसे ट्रायल के लिए फिट भी पाया। 4 मई 2023 को अभियोजन पक्ष ने सभी साक्ष्य अदालत के समक्ष भी पेश किए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 20 फरवरी को फैसला सुरक्षित भी रख लिया था। मंगलवार को अदालत ने अंतिम फैसला सुनाते हुए आरोपी को मृत्युदंड व 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
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