उत्तराखंड की जेलों में भीड़ का समाधान: छह स्थानों पर बन रही नई जेलें, 978 कैदियों के लिए बढ़ेगी क्षमता
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देहरादून : उत्तराखंड की जेलों में बढ़ती कैदी संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत की दिशा में बड़ा कदम उठाए हैं। गृह विभाग वर्तमान में 6 स्थानों पर नई जेलों के निर्माण और मौजूदा जेलों के विस्तार का कार्य कर रहा है। इन प्रयासों से राज्य की जेलों में 978 अतिरिक्त कैदियों को रखने की क्षमता भी बढ़ जाएगी।
वर्तमान में उत्तराखंड में नौ जिला जेल और 2 उप-जेलें संचालित हैं, जिनकी कुल मिलाकर 3741 कैदियों की क्षमता है। मगर जमीनी हकीकत यह है कि इन जेलों में 5200 से अधिक कैदी बंद हैं, यानी लगभग 1500 कैदी क्षमता से भी अधिक हैं। कुछ महीने पहले यह संख्या 7000 को भी पार कर गई थी, जिससे जेलों पर भारी दबाव भी बना।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार को उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गृह विभाग ने जेलों के निर्माण व विस्तार की प्रक्रिया को भी तेज किया।
इन स्थानों पर चल रहे हैं निर्माण कार्य:
- पिथौरागढ़ जिला कारागार का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और इसे जल्द चालू कर दिया जाएगा। यहां 80 कैदियों को रखने की व्यवस्था होगी।
- चंपावत में 208 बंदियों की क्षमता वाली नई जेल प्रस्तावित है।
- उत्तरकाशी में जेल निर्माण के लिए भूमि का चयन हो चुका है।
- हरिद्वार जिला जेल में 50 बंदियों के लिए हाई-सिक्योरिटी बैरक का निर्माण जारी है।
- देहरादून जिला जेल में 160 कैदियों की क्षमता वाली नई इकाई का निर्माण प्रगति पर है।
- ऊधम सिंह नगर में 2000 कैदियों की प्रस्तावित क्षमता वाले विशाल जिला कारागार की योजना है। प्रथम चरण में 480 कैदियों की जेल के निर्माण को स्वीकृति मिलनी बाकी है।
“जेलों में भीड़ घटेगी”
गृह सचिव शैलेश बगौली ने कहा कि
राज्य सरकार जेलों की स्थिति को गंभीरता से भी ले रही है। “जेल निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसके पूरा होते ही वर्तमान कैदियों के दबाव से काफी हद तक राहत भी मिलेगी।
इन निर्माण कार्यों के पूरा होने से न सिर्फ कैदियों के रहने की स्थिति सुधरेगी, बल्कि जेल प्रशासन को भी सुरक्षा, स्वास्थ्य व पुनर्वास के मोर्चे पर बेहतर कार्य करने में सहूलियत भी मिलेगी।




