LUCC और सोशल बेनिफिट घोटाले में समानता, फिर जांच में भेदभाव क्यों? कांग्रेस ने उठाए सवाल, CBI जांच की मांग
LUCC और सोशल बेनिफिट घोटाले में समानता, फिर जांच में दोहरे मापदंड क्यों? कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी का भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार
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देहरादून। उत्तराखंड में एक के बाद एक सामने आ रहे आर्थिक घोटालों को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर फिर बड़ा हमला बोला है। पार्टी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने आज शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता करते हुए LUCC और सोशल बेनिफिट घोटाले की तुलना करते हुए सवाल भी उठाया कि,
“जब दोनों मामलों में निवेशकों की ही लूट हुई है, तो फिर जांच एजेंसियों को लेकर दोहरा रवैया क्यों?”
सोशल बेनिफिट घोटाले में पूर्व सीएम के सलाहकार की पत्नी की सीधी भूमिका – कांग्रेस का आरोप
दसौनी ने बताया कि ‘सोशल बेनिफिट म्यूचुअल फंड लिमिटेड’ नामक कंपनी ने हजारों निवेशकों की गाढ़ी कमाई को भी ठगा। इस कंपनी में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के औद्योगिक सलाहकार के.एस. पंवार की पत्नी निदेशक पद पर भी थीं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि शुरुआती जांच में 200 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की पुष्टि भी हो चुकी है, लेकिन जैसे ही मामला सामने आया, पंवार की पत्नी से आनन-फानन में इस्तीफा ही दिलवा दिया गया।
गरिमा दसौनी ने भाजपा सरकार से पूछे तीखे सवाल:
- LUCC घोटाले की जांच सीबीआई को क्यों, और सोशल बेनिफिट घोटाले की जांच केवल EOW को ही क्यों दी गई?
क्या सत्ता से जुड़े लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है? - 40–50 हजार फर्जी FD व RD खातों के ज़रिए निवेशकों से की गई ठगी में भाजपा बताए कि कितनों के नाम का दुरुपयोग हुआ और काला धन किसने सफेद किया?
- क्या यह मात्र संयोग है कि दो बार जांच होने के बावजूद कार्रवाई ही नहीं हुई, या भाजपा की छाया में घोटाले को दबाया गया?
- मृत व्यक्तियों व अज्ञात लोगों के नाम पर निवेश — क्या ये हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला नहीं है?
कांग्रेस की मांगें:
- LUCC व सोशल बेनिफिट दोनों मामलों की संयुक्त जांच सीबीआई से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ही कराई जाए।
- के.एस. पंवार व उनकी पत्नी की संपत्ति की जांच ED और आयकर विभाग से ही करवाई जाए।
- जांच पूरी होने तक संपत्तियां फ्रीज भी की जाएं।
- LUCC की तर्ज पर सोशल बेनिफिट घोटाले के पीड़ितों को भी मुआवजा व राहत पैकेज भी दिया जाए।
“भाजपा की नीति: सत्ता से जुड़े चेहरों को बचाओ” : गरिमा दसौनी
गरिमा दसौनी ने कहा कि भाजपा सरकार की कार्रवाई स्पष्ट रूप से यह दर्शाती है कि वह केवल उन्हीं मामलों में ही सख्ती दिखाती है, जिनमें सत्ता पक्ष के लोग शामिल ही नहीं होते।
“जहां भाजपा या उससे जुड़े लोग संलिप्त होते हैं, वहां जांच को धीमा, कमजोर व दिशाहीन करने की कोशिश भी होती है।”
कांग्रेस की चेतावनी
अगर सरकार ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस इस मुद्दे को जन-जन तक लेकर भी जाएगी और 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को इसका करारा जवाब भी मिलेगा।




