उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण पर बहस तेज, सरकार और विपक्ष आमने-सामने
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देहरादून। देहरादून में गठित उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को लेकर सियासी व सामाजिक बहस भी तेज हो गई है। राज्य सरकार इसे संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन व शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष और कुछ संगठन इसे संस्थानों की स्वायत्तता से जोड़कर सवाल भी उठा रहे हैं।
सरकार का पक्ष: पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने प्राधिकरण के गठन के समय कहा था कि राज्य सरकार अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों का डाटा संकलन, पंजीकरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और शैक्षणिक मानकों की समीक्षा जैसे कदम भी उठा रही है। उनके अनुसार, उद्देश्य किसी संस्था को बंद करना नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता में लाना है।
सरकार का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने, वित्तीय लेनदेन में स्पष्टता लाने व विज्ञान, गणित, कंप्यूटर शिक्षा और कौशल विकास जैसे आधुनिक विषयों को बढ़ावा देने के लिए यह पहल भी की गई है।
मदरसा बोर्ड अध्यक्ष बोले—भ्रम फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण
मुफ्ती शमून कासमी, अध्यक्ष, उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड ने कहा कि प्राधिकरण को लेकर समाज में जानबूझकर भ्रम भी फैलाया जा रहा है। उनके मुताबिक इसका उद्देश्य शिक्षा को मजबूत करना और छात्रों को आधुनिक दौर के अनुरूप तैयार करना ही है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों का समावेश समय की मांग भी है और इससे छात्रों के भविष्य को नई दिशा भी मिलेगी।
विपक्ष की आशंकाएं
कांग्रेस नेता व पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों की स्वायत्तता संविधान द्वारा संरक्षित है और किसी भी प्रशासनिक हस्तक्षेप से पहले व्यापक संवाद भी जरूरी था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को लोगों की शंकाएं दूर करने को प्राथमिकता भी देनी चाहिए।
शिक्षा सुधार या सियासी मुद्दा?
शिक्षाविद राजनीकांत शुक्ला का कहना है कि शिक्षा से जुड़े विषय स्वभावतः संवेदनशील भी होते हैं। यदि प्राधिकरण छात्रों के हित में पारदर्शिता व गुणवत्ता सुधार लाता है तो इसका स्वागत होना चाहिए, लेकिन इसे राजनीतिक विवाद का विषय बनने से बचाना भी जरूरी है।
क्या है प्राधिकरण की संरचना?
फरवरी 2026 में गठित इस प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रो. (रि.) सुरजीत सिंह गांधी बनाए गए हैं और इसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों व शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षाविदों को सदस्य नामित भी किया गया है। महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा व निदेशक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद पदेन सदस्य होंगे, जबकि निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण पदेन सदस्य सचिव भी होंगे।
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