विदेशी पक्षियों से गुलजार हुई आसन झील, साइबेरिया और यूरोप से आए रंग-बिरंगे परिंदे
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विकासनगर: सर्दी की दस्तक के साथ ही आसन झील एक बार फिर विदेशी परिंदों से आबाद हो गई है। साइबेरिया, रूस, यूरोप और एशिया के विभिन्न हिस्सों से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर आए प्रवासी पक्षी इन दिनों झील की शोभा बढ़ा रहे हैं। रंग-बिरंगे पंखों और मधुर चहचहाहट से झील का हर कोना जीवंत हो उठा है। चकराता वन प्रभाग के तहत आने वाले आसन कंजर्वेशन वेटलैंड (रामपुर मंडी रामसर साइट) में प्रवासी पक्षियों का आगमन अक्टूबर माह से मार्च तक जारी रहता है। वन विभाग के अनुसार, शुरुआती अक्टूबर में ही साइबेरियन बत्तख (सुर्खाब) और अन्य विदेशी प्रजातियाँ यहां पहुंचने लगती हैं। अब तक 17 से 18 प्रजातियों के करीब ढाई हजार पक्षी आसन झील में पहुंच चुके हैं। वन दरोगा प्रदीप सक्सेना ने बताया कि आने वाले दिनों में नवंबर-दिसंबर तक लगभग 32 प्रजातियों के पांच हजार से अधिक पक्षी यहां पहुंच जाएंगे। इनमें बार हेडेड गूज, पिंटेल, टफ्टेड डक, कॉमन टील, और रेड क्रेस्टेड पोचार्ड जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ शामिल हैं।
सर्द देशों की कठोर ठंड से बचने के लिए ये पक्षी हर साल करीब 16,000 किलोमीटर की दूरी तय करके उत्तराखंड की इस झील में आते हैं। यहां का मध्यम तापमान, समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र और भरपूर जल उपलब्धता इन्हें आकर्षित करती है। सुबह की सुनहरी धूप में इन रंगीन परिंदों को झील में तैरते और डुबकी लगाते देखना पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों के लिए किसी प्राकृतिक उत्सव से कम नहीं। कई लोग कैमरों में इन दुर्लभ पक्षियों के शानदार नज़ारे कैद करने पहुंच रहे हैं। पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने निगरानी और गश्त बढ़ा दी है। उच्चाधिकारियों की देखरेख में विशेष टीमें और प्रशिक्षु वनकर्मी झील क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं। प्रदीप सक्सेना ने बताया कि प्रवासी पक्षियों की गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग और डेटा कलेक्शन भी किया जा रहा है, ताकि उनके प्रवास और व्यवहार का अध्ययन किया जा सके। जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, आसन झील में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और बर्ड फोटोग्राफर्स की भीड़ बढ़ने लगी है। स्थानीय होटल और गाइड सेवाएं भी सक्रिय हो गई हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह मौसम बर्ड वॉचिंग का स्वर्णिम अवसर लेकर आया है।




