मेलोडी के बाद अब देहरादून की लीची पहुंचेगी इटली — पहली बार 1000 किलो का ऐतिहासिक निर्यात
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देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की PM जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी भेंट करने के बाद अब भारत व इटली के बीच स्वाद का एक नया रिश्ता जुड़ने भी जा रहा है। इस बार बारी है देहरादून की विश्व प्रसिद्ध लीची की और पहली बार 1,000 किलो लीची देहरादून से दिल्ली होते हुए इटली भेजी जा रही है, जिसे उत्तराखंड के बागवानी क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि भी माना जा रहा है। कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने इस खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया।
नाजुक फल को इटली तक पहुंचाना था बड़ी चुनौती
लीची एक अत्यंत संवेदनशील फल है। पेड़ से तोड़े जाने के बाद सामान्य परिस्थितियों में यह मात्र 3 दिन के भीतर खराब होने लगती है। यही कारण है कि वर्षों तक देहरादून की लीची अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में वह पहचान ही नहीं बना पाई, जिसकी वह हकदार भी थी।
आधुनिक तकनीक ने खोले निर्यात के रास्ते
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की मदद से इस बार आधुनिक पैकेजिंग तकनीक व कोल्ड चेन सिस्टम का उपयोग भी किया गया है। परिवहन के दौरान पूरे सफर में 5 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखना जरूरी भी होता है। नई तकनीक के जरिए लीची को 10 दिन या उससे अधिक समय तक सुरक्षित भी रखा जा सकता है।
APEDA के टेक्निकल एक्सपर्ट एनसी शाह ने बताया कि इससे पहले इसी तकनीक के जरिए बिहार के मुजफ्फरपुर से दुबई व पंजाब के पठानकोट से कतर तक लीची भेजी जा चुकी है, लेकिन देहरादून से इटली तक यह पहली बार ही हो रहा है।
किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार और दाम
उद्यान विभाग के निदेशक आरके सिंह ने बताया कि
विभाग का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी गुणवत्ता विकसित करना है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी भी उतरे। यदि इटली भेजी जा रही यह खेप सफल रही, तो भविष्य में यूरोप समेत अन्य देशों के बाजार भी देहरादून की लीची के लिए खुल भी सकते हैं। इससे राज्य के किसानों की आय बढ़ेगी व उत्तराखंड की बागवानी अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि
यह उत्तराखंड के किसानों व बागवानी क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण है और राज्य सरकार कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत भी है।
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