गोमुख और केदारताल में बनी छोटी झीलों पर चिंता, वैज्ञानिक बोले- अधिकांश अस्थायी
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नेपाल और तिब्बत में पांच दिन पहले हुई त्रासदी के बाद अब गंगा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने गंगोत्री ग्लेशियर के गोमुख और केदारताल क्षेत्र में बन रही छोटी-छोटी झीलों को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि समुद्रतल से करीब चार से पांच हजार मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश बढ़ने से इन झीलों में पानी की मात्रा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इनके कभी भी बड़ी आपदा का रूप लेने की आशंका है।
गंगोत्री ग्लेशियर के गोमुख क्षेत्र में गंगा के उद्गम स्थल के आसपास ग्लेशियर के मलबे पर कई छोटी झीलें बनी हुई हैं। इसी तरह केदारताल क्षेत्र में भी झीलें दिखाई दे रही हैं। पर्यावरणविद सुरेश भाई के मुताबिक गंगोत्री घाटी और ग्लेशियर क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील रहे हैं। उन्होंने कहा कि चार से पांच हजार मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहले बारिश के बजाय बर्फबारी होती थी, लेकिन अब बारिश अधिक होने से झीलों में पानी बढ़ रहा है। उन्होंने इन झीलों की नियमित निगरानी के साथ जल्द अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की मांग की।
गंगा विचार मंच के प्रांत संयोजक लोकेंद्र बिष्ट और गोमुख से लौटे ग्राम प्रहरी प्रखर बिष्ट ने भी प्रदेश सरकार से इन झीलों का गहन अध्ययन कराने की मांग की है।
हालांकि वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनीष मेहता ने इन झीलों को सुपरा ग्लेशियर झीलें बताया है। उनके अनुसार, इस तरह की अधिकांश झीलें अस्थायी होती हैं और इनसे आमतौर पर बड़े खतरे की आशंका नहीं होती।
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