दून दर्शन | देहरादून
उत्तराखंड वन विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटरों के वेतनमान निर्धारण का मामला लंबे समय से उलझा ही हुआ है। समान काम के बदले समान वेतन का लाभ मिलने की उम्मीद लगाए बैठे सैकड़ों कर्मचारियों को अब तक राहत ही नहीं मिल पाई है। वन विभाग व शासन के बीच इस मामले में पत्राचार भी जारी है, लेकिन वेतनमान तय करने का फार्मूला अब तक स्पष्ट ही नहीं हो पाया है।
दरअसल, वन विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटरों का स्वीकृत पद ढांचा ही नहीं है। उपनल के माध्यम से बिना स्वीकृत ढांचे के ही कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है। इससे विभाग का काम तो चल रहा है, लेकिन अब न्यायालय के आदेश के बाद समान काम के बदले समान वेतन का लाभ देने की प्रक्रिया में तकनीकी अड़चन भी सामने आ रही है।
समान काम के बदले समान वेतन से जुड़े आदेशों के अनुसार, जिन विभागों में स्वीकृत पद ढांचे के बिना कर्मचारियों को भी रखा गया है, वहां संबंधित कर्मचारियों को लेवल-1 यानी चतुर्थ श्रेणी के प्रारंभिक पद का वेतनमान दिए जाने का प्रावधान भी बताया गया है। वन विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटरों के मामले में भी इसी व्यवस्था को लेकर असमंजस भी बना हुआ है।
कंप्यूटर ऑपरेटरों का कहना है कि उनका काम तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के अनुरूप है और उन्हें उसी के अनुसार वेतनमान भी मिलना चाहिए। उनका दावा है कि अन्य विभागों में भी इसी तरह के पदों पर तृतीय श्रेणी के वेतनमान का लाभ भी दिया जा रहा है। दूसरी ओर, वन विभाग स्वीकृत पद ढांचा नहीं होने व लागू नियमों का हवाला देते हुए तृतीय श्रेणी का वेतनमान निर्धारित करने को लेकर स्पष्ट निर्णय ही नहीं ले पा रहा है।
वन विभाग के सीसीएफ एचआरडी पीके पात्रो ने बताया कि इस मामले में शासन से दिशा-निर्देश भी मांगे गए हैं। शासन से निर्देश प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।
वहीं, शासन की ओर से संबंधित पदों के लिए स्वीकृति दिए जाने की बात भी कही जा रही है। हालांकि, विभागीय पद ढांचे की स्वीकृति और वेतनमान निर्धारण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से मामला आगे ही नहीं बढ़ पा रहा है।
ऐसे में कंप्यूटर ऑपरेटरों के सामने असमंजस की स्थिति भी बनी हुई है। कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी के प्रारंभिक वेतनमान को स्वीकार करने के बजाय तृतीय श्रेणी के वेतनमान की मांग कर रहे हैं, जबकि वन विभाग नियमों के आधार पर निर्णय लेने के लिए शासन के स्पष्ट निर्देशों का इंतजार ही कर रहा है। अब इस मामले में शासन के अगले कदम पर कर्मचारियों के वेतनमान का निर्धारण निर्भर भी करेगा।
