पंजाब: भारत-पाकिस्तान सीमा पर नशे और हथियारों की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एंटी-ड्रोन सिस्टम और कड़ी निगरानी के बावजूद तस्कर नए तरीके अपना रहे हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देशभर में ड्रोन के जरिए तस्करी के 305 मामले पकड़े गए, जिनमें से 298 अकेले पंजाब में सामने आए।

देश में जब्त हेरोइन का 58 प्रतिशत पंजाब में मिला

NCB की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-पाकिस्तान सीमा का पश्चिमी गलियारा हेरोइन तस्करी का प्रमुख रास्ता बना हुआ है। पंजाब के अलावा राजस्थान और जम्मू-कश्मीर भी तस्करी से प्रभावित क्षेत्र हैं।

वर्ष 2025 में देशभर में कुल 3,567 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई। इसमें से 2,086 किलोग्राम हेरोइन पंजाब में बरामद हुई, जो कुल जब्ती का करीब 58 प्रतिशत है। ड्रोन के जरिए हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों के साथ हथियारों और नकली करेंसी की आपूर्ति का खतरा भी बना हुआ है।

अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और गुरदासपुर प्रभावित

पंजाब के सीमावर्ती जिलों में अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और गुरदासपुर में तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इनमें अमृतसर में नशा तस्करी के सबसे अधिक मामले दर्ज होने की बात कही गई है।

हेरोइन के अलावा गांजा, अफीम, डोडा, नशीले इंजेक्शन और गोलियां भी बरामद की जा रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल पंजाब में कोडीन आधारित कफ सिरप की 8.95 लाख बोतलें जब्त की गईं, जो देशभर में सबसे अधिक बताई गई हैं। बुप्रेनॉर्फिन, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी दवाओं के दुरुपयोग को रोकना भी एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है।

51.41 करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए नौ एंटी-ड्रोन सिस्टम

ड्रोन के जरिए तस्करी रोकने के लिए पंजाब सरकार ने सीमा पर नौ अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित किए हैं। इनकी खरीद पर 51.41 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

इन प्रणालियों में ड्रोन और उसके नियंत्रण केंद्र की स्थिति का पता लगाने, वास्तविक समय में नक्शे पर खतरे की जानकारी देने और स्वत: चेतावनी जारी करने जैसी क्षमताएं हैं। हालांकि, इन तकनीकी इंतजामों के बावजूद ड्रोन के जरिए तस्करी की घटनाएं सामने आ रही हैं।

नौ महीने में 850 किलो हेरोइन और 261 हथियार बरामद

सीमा सुरक्षा बल (BSF) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 तक पंजाब सीमा पर 850 किलोग्राम हेरोइन और 261 हथियार बरामद किए गए। इस अवधि में 182 ड्रोन भी बरामद हुए। इसके अलावा 44 किलोग्राम अफीम और करीब 14 किलोग्राम आईसीई यानी क्रिस्टल मेथामफेटामाइन जब्त की गई।

तस्करों के बदलते तरीके बढ़ा रहे मुश्किलें

सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती केवल ड्रोन का पता लगाने की नहीं, बल्कि उसके जरिए गिराई गई खेप को उठाने वाले लोगों की पहचान करने की भी है। रात में और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन निगरानी को मुश्किल बनाते हैं। कई मामलों में खेप निर्धारित स्थान पर गिराने के बाद उसे उठाने के लिए स्थानीय लोगों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका रहती है।

इसी को देखते हुए BSF और पंजाब पुलिस तकनीकी निगरानी के साथ खुफिया जानकारी के आधार पर संयुक्त कार्रवाई कर रही हैं। सीमा से पांच से आठ किलोमीटर अंदर तक संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और सीमावर्ती गांवों में सूचना तंत्र मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

नशा और हथियार तस्करी रोकने पर जोर

पंजाब के डीजीपी गौरव यादव के अनुसार, राज्य पुलिस नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध हथियारों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य सुरक्षित और नशा-मुक्त पंजाब सुनिश्चित करना है।