भूकंप के खतरे को देखते हुए देहरादून की ज़मीन की मजबूती की होगी जांच, CSIR बेंगलुरु करेगा विस्तृत अध्ययन – Doon Darshan
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भूकंप के खतरे को देखते हुए देहरादून की ज़मीन की मजबूती की होगी जांच, CSIR बेंगलुरु करेगा विस्तृत अध्ययन

भूकंप के खतरे में देहरादून: अब CSIR बेंगलुरु करेगा ज़मीन की मजबूती का विस्तृत अध्ययन


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देहरादून: भूकंप के अति संवेदनशील जोन-4 व 5 में आने वाला देहरादून अब भूकंपीय दृष्टि से और गहराई से जांचा भी जाएगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर अब CSIR चौथा पीआई बेंगलुरु (पूर्व नाम: मैथमैटिकल मॉडलिंग एंड कंप्यूटर सिमुलेशन) देहरादून की ज़मीन की मजबूती व भू-संरचना को लेकर एक विस्तृत अध्ययन भी शुरू करने जा रहा है।

इसकी घोषणा वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान में भूकंप पर आयोजित कार्यशाला के दौरान मुख्य वैज्ञानिक डॉ. इम्तियाज परवेज़ ने की। उन्होंने बताया कि

हिमालयी क्षेत्रों में भूकंप की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र सरकार ने कुछ शहरों का चयन अध्ययन के लिए किया है, जिसमें देहरादून भी शामिल है।

क्या होगा अध्ययन में?

अध्ययन के तहत यह जाना जाएगा कि दून घाटी की ज़मीन किस प्रकार के अवसाद (sediment) से बनी है व उसकी मोटाई कितनी है। इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों में ज़मीन की स्थिति व संवेदनशीलता के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किस इलाके में किस तरह के भवन निर्माण उपयुक्त हैं।

डॉ. परवेज़ ने बताया कि

अध्ययन तीन वर्षों में पूरा किया जाएगा और इसके अंतर्गत भूस्खलन व बाढ़ संभावित क्षेत्रों की भी जांच की जाएगी। परियोजना को जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद भी है।

10 किमी गहराई तक आने वाले भूकंप अधिक खतरनाक

कार्यशाला के समापन पर आईआईएसईआर कोलकाता के प्रो. सुप्रियो मित्रा ने बताया कि

उत्तराखंड, हिमाचल व जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में अधिकतर बड़े भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई तक ही आते हैं, जो अपेक्षाकृत अधिक खतरनाक भी होते हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि 2015 का गोरखा भूकंप अधिक गहराई में आया था, इसलिए उसकी तीव्रता के बावजूद नुकसान भी सीमित रहा।

‘भविष्य के भूकंपों को समझने के लिए इतिहास को खंगालना ज़रूरी’

इस मौके पर IIT मुंबई के प्रो. मलय मुकुल ने कहा कि

भूकंप को समझने के लिए मैक्रो से माइक्रो स्तर तक अध्ययन करना भी आवश्यक है — यानी हजार किलोमीटर से लेकर नैनोमीटर तक की जांच।

वहीं, IIT कानपुर के प्रो. जावेद मलिक ने कहा कि

भविष्य के भूकंपों की भविष्यवाणी के लिए पुराने, ऐतिहासिक भूकंपों का भी अध्ययन जरूरी ही है। हालांकि यह प्रक्रिया जटिल होती है और इसके लिए जमीन में ट्रेंच खोदकर विशेष तकनीकी अध्ययन की जरूरत भी होती है।

देहरादून जैसे संवेदनशील शहर के लिए यह अध्ययन भविष्य में भूकंप से बचाव व सतर्कता की दिशा में मील का पत्थर भी साबित हो सकता है। साथ ही, इससे भवन निर्माण के मानकों को बेहतर बनाने व आपदा प्रबंधन की योजना को भी सुदृढ़ करने में मदद भी मिलेगी।


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