ऋषिकेश में भी अंडरग्राउंड बिजली लाइनें, केंद्र ने 547 करोड़ की दी मंजूरी; हरिद्वार में अधूरा काम बना सबक
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देहरादून: बनारस व हरिद्वार के बाद अब ऋषिकेश भी अंडरग्राउंड विद्युत लाइनों वाले शहरों की सूची में शामिल होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इसके लिए 547.83 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी है। यह देश का तीसरा शहर होगा, जहां बिजली के तारों को भूमिगत भी किया जाएगा।
इस योजना के तहत ऋषिकेश कुंभ क्षेत्र (गंगा कॉरिडोर) में विद्युत लाइनों का भूमिगतीकरण व ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून में विद्युत प्रणाली का स्वचालन (स्काडा) किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि यह परियोजना चारधाम यात्रा व धार्मिक पर्यटन के लिहाज से बेहद अहम भी है।
गौरतलब है कि हरिद्वार में कुंभ मेले से पहले मुख्य बाजार को केबल मुक्त करने के लिए अंडरग्राउंड केबलिंग भी शुरू की गई थी, लेकिन आज भी करीब 40% काम अधूरा ही है। अधूरे काम के कारण कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित भी रहती है। गायत्री विहार कॉलोनी में पिछले 3 महीनों से हर हफ्ते 20-20 घंटे बिजली गुल रहना इसका उदाहरण भी है। स्थानीय लोग बिजली विभाग से शिकायत कर थक चुके हैं, लेकिन समाधान अब तक भी नहीं मिला।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में शुरू हुई यह योजना हरिद्वार में अधूरेपन और रखरखाव की कमी के कारण सवालों के घेरे में भी है। अब देखना होगा कि ऋषिकेश में शुरू होने वाला यह प्रोजेक्ट समय पर और पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा भी हो पाता है या नहीं, ताकि शहर में लटकते बिजली तारों से मुक्ति मिल सके और यात्रियों व स्थानीय लोगों को सुरक्षित और व्यवस्थित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित भी हो।




