देश के विभिन्न राज्यों में कोडीनयुक्त कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामलों के बाद सख्ती भी बढ़ा दी गई है। उत्तराखंड में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां हरिद्वार जिले के रुड़की के भगवानपुर क्षेत्र में खांसी की सिरप पीने से एक 3 वर्षीय बच्ची की हालत गंभीर भी हो गई।
बच्ची को तुरंत दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती भी कराया गया, जहां डॉक्टरों ने समय पर इलाज कर उसकी जान भी बचा ली। बच्ची को 7–8 दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया और इलाज के बाद 10 दिसंबर को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई।
दून अस्पताल के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक ने बताया कि बच्ची को लोकल प्रैक्टिशनर से खरीदी गई कफ सिरप अधिक मात्रा में पिलाई भी गई थी, जिससे उसे गंभीर रिएक्शन हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि 4 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप देना खतरनाक भी हो सकता है, क्योंकि इनमें डेक्सट्रोमेथार्फिन व सीपीएम जैसे तत्व होते हैं, जो बच्चों के लिए हानिकारक भी हैं।
डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को बिना विशेषज्ञ की सलाह के कफ सिरप न दें व किसी भी बीमारी में बाल रोग विशेषज्ञ को ही दिखाएं।
