नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रामनगर में निर्धारित स्थानों के अलावा अन्य जगह बीफ की दुकान खोलने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिकाकर्ता उमर कुरैशी ने नगर पालिका परिषद रामनगर के सीमा क्षेत्र में निर्धारित स्थलों से बाहर दुकान खोलने की अनुमति मांगी थी। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि व्यापार करने का मौलिक अधिकार असीमित नहीं है और जनहित में इस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

रामनगर में बीफ की दुकानों के लिए तय हैं स्थान

सुनवाई के दौरान नगर पालिका परिषद की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2006 के राजपत्रित उप-नियमों के तहत रामनगर में बीफ की दुकानों की संख्या और उनके स्थान निर्धारित किए गए हैं। इन नियमों के अनुसार, मोहल्ला खतारी मीट मार्केट में 12 और मोहल्ला गूलरघट्टी में 4 दुकानें निर्धारित हैं। यानी कुल 16 दुकानों की सीमा तय की गई है।

नगर पालिका के अधिवक्ता ने बताया कि 16 मई 2026 को समाचार पत्र में नोटिस जारी कर दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया पूरी की गई थी। हालांकि, याचिकाकर्ता उमर कुरैशी ने इस प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया था।

व्यापार के मौलिक अधिकार पर कोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापार और व्यवसाय करने का मौलिक अधिकार निरपेक्ष नहीं है। जनहित में इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं और व्यापारियों को संबंधित नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

नियमों को चुनौती दिए बिना नहीं मिल सकती अलग जगह दुकान की अनुमति

अदालत ने कहा कि जब तक संबंधित उप-नियमों को कानूनी रूप से चुनौती नहीं दी जाती और उनमें बदलाव नहीं होता, तब तक नगर पालिका को निर्धारित स्थानों के अलावा किसी अन्य जगह दुकान खोलने की अनुमति देने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया।

कोर्ट के फैसले का मतलब: रामनगर में बीफ की दुकानें निर्धारित स्थानों और नगर पालिका के लागू नियमों के अनुसार ही संचालित की जा सकती हैं। किसी अन्य स्थान पर दुकान खोलने के लिए केवल व्यापार करने के मौलिक अधिकार का हवाला देकर नियमों से अलग अनुमति नहीं मांगी जा सकती।