देहरादून: उत्तराखंड में डेनिस शराब को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा सरकार को खुली चुनौती दी है। हरीश रावत ने कहा कि अगर डेनिस शराब के मामले में घोटाला हुआ है, तो सरकार इसकी निष्पक्ष जांच कराए। उन्होंने कहा कि वह खुद जांच के लिए गठित टास्क फोर्स के सामने पेश होने को तैयार हैं।

हरीश रावत ने भाजपा सरकार से पूछे सवाल

हरीश रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा समय-समय पर डेनिस शराब को लेकर उन पर सवाल उठाती रही है। अब उन्होंने सरकार से ही इस मामले की जांच कराने की मांग की है।

रावत ने सवाल उठाया कि अगर डेनिस शराब गलत थी, तो आज भाजपा सरकार के कार्यकाल में इसकी बिक्री कैसे हो रही है? उन्होंने दावा किया कि डेनिस आज भी आर्मी कैंटीनों में बिक रही है। उनके मुताबिक, अगर मामले में कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

‘एक चूक हुई, जो विश्वास पर आधारित थी’

पूर्व मुख्यमंत्री ने माना कि डेनिस शराब के मामले में उनसे एक चूक हुई थी, जो विश्वास पर आधारित थी। उन्होंने बताया कि गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) और कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) को लाभ में लाने के उद्देश्य से शराब बिक्री की जिम्मेदारी दी गई थी।

हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि इस प्रक्रिया में डेनिस ब्रांड को लेकर हुई गतिविधियों पर उनके सलाहकार ध्यान क्यों नहीं दे पाए।

20 फीसदी मार्केटिंग राइट से 70-80 फीसदी तक कैसे पहुंचा मामला?

हरीश रावत ने कहा कि उनका आदेश था कि उत्तराखंड के फल और सब्जियों का इस्तेमाल करने वाले डिस्टिलर्स को 20 प्रतिशत रिजर्व मार्केटिंग राइट दिया जाए।

उन्होंने सवाल किया कि फिर तीन से चार महीने तक दूसरे ब्रांड्स को ब्लॉक करके यह हिस्सेदारी कथित तौर पर 70 से 80 प्रतिशत तक कैसे पहुंच गई? उन्होंने पूछा कि इसके पीछे किसकी भूमिका थी और क्या इसमें किसी तरह की मिलीभगत हुई थी।

रावत ने यह भी कहा कि शुरुआत में वह डेनिस नाम से परिचित नहीं थे और लंबे समय तक इसे डेनिम कहते रहे। उनके अनुसार, भाजपा ने बार-बार इस मुद्दे को उठाया, जिससे यह विवाद लगातार चर्चा में बना रहा।

‘मेरा डेनिस, तेरा डेनिस नहीं, निष्पक्ष जांच हो’

हरीश रावत ने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो विशेष जांच दल (STF) गठित कर पूरे प्रकरण की जांच करा सकती है और वह जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में डेनिस के अलावा हिलटॉप, काफल, माल्टा और संतरा जैसे ब्रांड भी बाजार में मौजूद हैं। ऐसे में अगर पुराने मामले में कोई गलती हुई है, तो राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

डेनिस शराब को लेकर हरीश रावत के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अब इस मामले में राज्य सरकार और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की ओर से आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर रहेगी।