नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (PWD) में कनिष्ठ अभियंताओं के पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधियाचन के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने यह आदेश राहुल सैनी और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को होगी।
10 साल से अधिक समय से संविदा पर काम कर रहे हैं याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता संदीप तिवारी ने कोर्ट को बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से लोक निर्माण विभाग में संविदा कनिष्ठ अभियंता के रूप में कार्यरत हैं। उनका कहना है कि वे स्वीकृत पदों के लिए निर्धारित आवश्यक योग्यताएं भी पूरी करते हैं।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि उनकी सेवाओं को लेकर कोई निर्णय किए बिना उन्हीं पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही थी। इससे उनके रोजगार पर संकट पैदा हो गया था।
नियमितीकरण पर विचार करने का पहले भी दिया था निर्देश
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, हाईकोर्ट ने इससे पहले 10 अगस्त 2026 को दिए गए फैसले में राज्य सरकार को संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया पर विचार करने का निर्देश दिया था।
इसके बावजूद लोक निर्माण विभाग में कनिष्ठ अभियंताओं के पदों पर नई भर्ती के लिए 30 जुलाई 2026 को अधियाचन भेजा गया। याचिकाकर्ताओं ने इसी आदेश को चुनौती दी थी।
सरकार ने नियमावली 2025 का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि नियमावली 2025 के तहत निर्धारित पात्रता शर्तों को ध्यान में रखते हुए नई भर्ती का अधियाचन भेजा गया था। सरकार ने यह भी कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ विशेष अपील दायर कर सकती है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फिलहाल 30 जुलाई 2026 के भर्ती अधियाचन के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।
27 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
फिलहाल, अदालत के अंतरिम आदेश से याचिकाकर्ता संविदा कनिष्ठ अभियंताओं को राहत मिली है। हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं है। मामले में आगे की सुनवाई और अदालत के अगले आदेश के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
