उत्तरकाशी: बाड़ाहाट के थोलू पर्व के अवसर पर बाड़ाहाट के आराध्य व न्याय के देवता कंडार देवता की भव्य हाथी रथयात्रा निकाली गई। ढोल-दमाऊ व रणसिंगे की गूंज के बीच पांडव पश्वों की अगुवाई में यात्रा पूरे नगर क्षेत्र से भी गुजरी। इस दौरान स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने रासो-तांदी लोकनृत्य किया और फूल बरसाकर रथयात्रा का स्वागत भी किया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कंडार देवता का आशीर्वाद भी लिया।

थोलू पर्व के दूसरे दिन क्षेत्र के विभिन्न गांवों से लोग चमाला की चौरी में एकत्र हुए, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद कंडार देवता की प्रतिकात्मक हाथी प्रतिमा भी तैयार की गई। इसके बाद देवता की मूर्ति को हाथी रथ पर विराजमान कर नगर में भव्य रथयात्रा निकाली गई, जो मुख्य बाजार होते हुए मणिकर्णिका घाट तक पहुंची। यहां मां गंगा की विशेष पूजा के बाद यात्रा पुनः चमाला की चौरी पहुंचकर संपन्न भी हुई।

मान्यता है कि कंडार देवता बाड़ाहाट के राजा व न्याय के देवता हैं, जिन्हें उत्तरकाशी का कोतवाल और क्षेत्राधिपति भी माना जाता है। श्रद्धालु विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए उनके दरबार में भी पहुंचते हैं।