पंजाब: जल सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग में 24.34 लाख रुपये के कथित गबन के मामले में विजिलेंस ब्यूरो ने छह अधिकारियों-कर्मचारियों और तीन ठेकेदारों समेत नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि जलापूर्ति योजना के रखरखाव के नाम पर बिना काम कराए फर्जी बिल तैयार किए गए और उनके आधार पर भुगतान हासिल किया गया। मामले में विभागीय रिकॉर्ड, स्वीकृतियों और भुगतान प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
नामजद आरोपियों में एक्सईएन जसविंदर सिंह, एसडीओ संदीप सिंह, जेई परविंदर सिंह, सीनियर असिस्टेंट जस्मित सिंह और तारा सिंह, डाटा एंट्री ऑपरेटर सतनाम सिंह तथा ठेकेदार करनैल सिंह, हरदीप सिंह और जसवीर सिंह शामिल हैं।
जांच के अनुसार, 23 अक्टूबर 2024 को जलापूर्ति योजना के रखरखाव के लिए 73.36 लाख रुपये जारी किए गए थे। इसके बाद 25 अक्टूबर को सात कार्यों के लिए कोटेशन मांगे गए। इन कार्यों की शुरुआती अनुमानित लागत 49,900 रुपये प्रति कार्य रखी गई थी। आरोप है कि इनमें से छह कार्यों की लागत बढ़ाकर करीब पांच लाख रुपये प्रति कार्य कर दी गई।
मामले में तत्कालीन सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सुखपिंदर सिंह के कथित फर्जी हस्ताक्षरों से मंजूरी लिए जाने का आरोप भी सामने आया है। बताया गया है कि सुखपिंदर सिंह ने संबंधित हस्ताक्षर अपने होने से इनकार किया था। इसके बाद स्वीकृति प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि कार्य पूरे होने का रिकॉर्ड तैयार कर 28 अक्टूबर को बिल बनाए गए और अगले दिन, 29 अक्टूबर को ठेकेदारों के खातों में भुगतान किया गया। आरोप है कि कार्यस्थल का निरीक्षण किए बिना ही मेजरमेंट बुक में काम पूरा होने से संबंधित प्रविष्टियां दर्ज कर दी गईं। इसी आधार पर भुगतान की प्रक्रिया पूरी किए जाने की आशंका जताई गई है।
मामले की विभागीय जांच के बाद जनवरी 2025 में एक्सईएन समेत चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद मामला आगे की जांच के लिए विजिलेंस ब्यूरो को सौंपा गया। अब विजिलेंस ने नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर कथित गबन और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू कर दी है।
डीएसपी विजिलेंस विनोद कुमार के अनुसार, मामले की जांच जारी है। जांच के दौरान दस्तावेजों, स्वीकृतियों, कार्यों के रिकॉर्ड और भुगतान से संबंधित पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
