नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल गवाहों को धमकी मिलने के आरोप के आधार पर किसी आपराधिक मुकदमे को एक अदालत से दूसरी अदालत में स्थानांतरित ही नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि गवाहों की सुरक्षा के लिए कानून में व्यवस्था उपलब्ध है, तो पहले उसी का उपयोग भी किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की एकलपीठ ने हत्या व शस्त्र अधिनियम से जुड़े एक मामले में दायर स्थानांतरण याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी भी की। याचिकाकर्ता ने देहरादून में लंबित मुकदमे को हरिद्वार स्थानांतरित करने की मांग भी की थी और आरोप लगाया था कि आरोपी पक्ष से गवाहों को लगातार धमकियां भी मिल रही हैं।

सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता सहित प्रमुख गवाहों के बयान पहले ही दर्ज भी किए जा चुके हैं और सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष किसी तरह की धमकी की शिकायत ही नहीं की गई। हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड गवाह संरक्षण अधिनियम, 2020 के तहत गवाहों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद भी हैं। ऐसे में पहले गवाह संरक्षण की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, न कि मुकदमे के स्थानांतरण की भी मांग।