Chamoli Avalanche: अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद श्रमिकों की चिंता, जेब में एक भी पैसा नहीं, घर कैसे पहुंचेंगे?
Uttarakhand: माणा हिमस्खलन से प्रभावित श्रमिकों के लिए घर लौटना बनी चुनौती
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देहरादून: माणा क्षेत्र में हुए हिमस्खलन के बाद सुरक्षित निकाले गए श्रमिकों के लिए घर वापस लौटना अब एक बड़ी चुनौती भी बन गई है। उनका सारा सामान व पैसा बर्फ में ही दब चुका है, और अब उनके पास एक भी रुपया नहीं बचा है। हालांकि, कंपनी ने उन्हें हरिद्वार तक भेजने की व्यवस्था भी की है, लेकिन उनके घर पहुंचने के लिए अब कोई ठोस योजना ही नहीं है।
44 श्रमिकों को सेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जबकि 2 श्रमिकों को एम्स ऋषिकेश में भर्ती किया गया था। अब उनकी स्थिति में सुधार आने के बाद, सोमवार व मंगलवार को क्रमशः 37 श्रमिकों को अस्पताल से छुट्टी दी गई। लेकिन अब उनके सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है।
श्रमिकों का कहना है कि उनका सारा सामान बर्फ में ही दबकर खत्म हो चुका है। उनके पास केवल तन के कपड़े व पैरों में चप्पल हैं। कंपनी ने उन्हें केवल हरिद्वार तक पहुंचाने की व्यवस्था की है, लेकिन आगे क्या होगा, इसका कोई स्पष्ट जवाब ही नहीं है। उनका कहना है कि भगवान ने उन्हें हिमस्खलन से बचाया है, अब आगे का रास्ता भगवान पर ही छोड़ दिया है।
श्रमिकों की बातें:
“हमारे पास कोई पैसे नहीं हैं और न ही कोई सामान बचा है। बस तन पर कपड़े व पैरों में चप्पल हैं। कंपनी ने हमें हरिद्वार तक भेजने की व्यवस्था की है, लेकिन आगे का कुछ भी पता नहीं है। भगवान ने हमें बचाया है, आगे कुछ न कुछ रास्ता जरूर मिलेगा।” – जयेंद्र प्रसाद, वेल्डर, बिहार निवासी।
“घर जाने के लिए हमारे पास एक भी पैसा नहीं है। सारा सामान तो हिमस्खलन में ही दब गया। जो कपड़े पहने हैं, वही बचा है। कंपनी ने हरिद्वार तक जाने की व्यवस्था की है, अब उम्मीद है कि आगे भी कंपनी कोई व्यवस्था करेगी।” – जितेश कुमार, बिहार निवासी।
कंपनी और प्रशासन का रुख:
कंपनी ने श्रमिकों के लिए ज्योतिर्मठ से हरिद्वार तक जाने की व्यवस्था की है, जहां से कंपनी के कर्मचारी आगे की सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। एसडीएम ज्योतिर्मठ चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि श्रमिकों को किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए व्यवस्था की जाएगी। उन्हें सुरक्षित घर भेजने के लिए कंपनी को भी कहा जाएगा।




