हल्द्वानी: महिला अस्पताल में घटती किलकारियां, स्टाफ की कमी से डिलीवरी मामलों में आई गिरावट
रात में स्टाफ की कमी बनी गर्भवतियों की परेशानी का कारण, महिला अस्पताल से हर महीने 70 तक रेफरल
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हल्द्वानी। राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए चलाई जा रही योजनाओं को तब झटका लगता है, जब रात के समय गर्भवती महिलाओं को आवश्यक चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण रेफर भी किया जाता है। शहर के एकमात्र महिला अस्पताल में रात की शिफ्ट में स्टाफ की भारी कमी के चलते प्रसव दर में लगातार ही गिरावट आ रही है और हर माह दर्जनों महिलाएं अन्य अस्पतालों के लिए रेफर भी की जा रही हैं।
महिला अस्पताल में स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) के लिए 7 स्टाफ नर्सों व 1 मेडिकल अधिकारी की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में केवल 3 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। वहीं, 4 में से 1 गायनी डॉक्टर रामनगर में सेवा दे रही हैं और एक अवकाश पर ही रहती हैं। नतीजतन अस्पताल की सारी जिम्मेदारी केवल 2 महिला चिकित्सकों पर ही है।
गंभीर मामलों में रोजाना रेफर हो रहीं गर्भवतियां
स्टाफ की कमी के चलते प्री-मैच्योर डिलीवरी, कम वजन, डायबिटीज, सांस संबंधी दिक्कतें व हृदयगति से जुड़ी जटिलताओं वाले मामलों को नियमित रूप से सुशीला तिवारी अस्पताल ही रेफर किया जा रहा है। फिलहाल महिला अस्पताल में सिर्फ फोटोथेरेपी की ही सुविधा उपलब्ध है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. एचसी पंत का कहना है कि,
“जल्द ही आउटसोर्सिंग के माध्यम से आवश्यक स्टाफ की व्यवस्था भी की जा रही है।”
सड़क पर प्रसव का खतरा, साधन न मिलने से बढ़ती मुश्किलें
गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों के लिए सबसे बड़ी समस्या तब खड़ी होती है जब रात के समय रेफर किए जाने पर तत्काल वाहन या एम्बुलेंस उपलब्ध ही नहीं होती। कई बार महिलाओं को सड़क किनारे ही इंतजार करना पड़ता है और रास्ते में ही प्रसव पीड़ा शुरू होने का खतरा भी बना रहता है। खराब मौसम व अन्य अस्पतालों में महिला चिकित्सकों की अनुपलब्धता की स्थिति में खतरा और भी बढ़ जाता है।
प्रसव दर में गिरावट, पहले 50+ डिलीवरी प्रतिदिन होती थीं
महिला अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ऊषा जंगपांगी ने बताया कि,
“हर माह औसतन 60 से 70 गर्भवतियों को प्रसव से पहले रेफर भी करना पड़ रहा है, जिससे अस्पताल की डिलीवरी दर में गिरावट भी आई है। पहले यहां प्रतिदिन 50 से अधिक डिलीवरी होती थीं, लेकिन अब यह संख्या घट गई है।”
एक साल में प्रतिमाह दर्ज डिलीवरी आंकड़े (2024-25):
| महीना | डिलीवरी संख्या |
|---|---|
| अप्रैल 2024 | 207 |
| मई | 273 |
| जून | 295 |
| जुलाई | 305 |
| अगस्त | 396 |
| सितंबर | 393 |
| अक्टूबर | 338 |
| नवंबर | 323 |
| दिसंबर | 267 |
| जनवरी 2025 | 338 |
| फरवरी 2025 | 278 |
| मार्च 2025 | 247 |
| अप्रैल 2025 | 193 |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अप्रैल 2025 में डिलीवरी की संख्या घटकर 193 ही रह गई है, जो पिछले एक साल की तुलना में सबसे कम है।




