उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की नई व्यवस्था लागू, मान्यता शुल्क तय न होने से बढ़ी असमंजस की स्थिति
उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता के लिए नई नियमावली लागू हो गई है, लेकिन मान्यता और नवीनीकरण शुल्क अब तक तय नहीं हो पाया है। 1 जुलाई से मदरसा बोर्ड समाप्त होने जा रहा है, ऐसे में सैकड़ों संस्थान नई व्यवस्था को लेकर सरकार के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता व नवीनीकरण के लिए नियमावली जारी कर दी है, लेकिन मान्यता शुल्क अब तक निर्धारित नहीं होने से संस्थानों के सामने असमंजस की स्थिति भी बनी हुई है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में आगामी 1 जुलाई से मदरसा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त भी होने जा रहा है।
राज्य में वर्तमान में लगभग 450 पंजीकृत व करीब 500 अपंजीकृत मदरसे संचालित हैं। मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद सभी मदरसों व अन्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करनी भी होगी।
नई नियमावली के अनुसार, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा व मान्यता प्राप्त होने के बाद प्रत्येक 3 वर्ष में उसका नवीनीकरण भी कराना होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी व इसके साथ निर्धारित शुल्क भी ऑनलाइन जमा करना होगा। हालांकि अभी तक शुल्क की दरें तय ही नहीं की गई हैं, जिससे संस्थानों को आगे की प्रक्रिया को लेकर इंतजार करना भी पड़ रहा है।
नियमावली के तहत उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण प्राप्त आवेदनों की जांच भी करेगा। आवश्यकता पड़ने पर संस्थानों का निरीक्षण कराया भी जा सकेगा। जांच के बाद निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को मान्यता प्रदान भी की जाएगी।
मान्यता के लिए प्रमुख शर्तें
- शैक्षणिक संस्थान किसी मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित व संचालित होना चाहिए।
- संस्थान संबंधित शैक्षणिक परिषद या बोर्ड से संबद्ध भी होना चाहिए।
- संस्थान ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा जिससे सांप्रदायिक या सामाजिक सद्भाव प्रभावित भी हो।
- शिक्षकों की नियुक्ति निर्धारित योग्यता व मानकों के अनुसार की जाएगी।
- किसी छात्र या कर्मचारी को धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए बाध्य ही नहीं किया जाएगा।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि मान्यता व नवीनीकरण शुल्क को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। विभाग जल्द ही शुल्क संरचना निर्धारित करेगा, जिसके बाद संस्थानों के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह शुरू भी हो सकेगी।
मदरसा बोर्ड के समापन व नई व्यवस्था के लागू होने के बीच शुल्क निर्धारण में हो रही देरी को लेकर कई संस्थानों में चिंता भी बनी हुई है। संस्थान अब सरकार की ओर से जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने की प्रतीक्षा भी कर रहे हैं।
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