UKSSSC परीक्षा में पेपर लीक या नकल? सरकार की सफाई और बढ़ता विवाद
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21 सितंबर 2025 को उत्तराखंड में यूकेएसएसएससी (UKSSSC) परीक्षा आयोजित की गई थी। इसी परीक्षा के दौरान हरिद्वार स्थित आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज, बहादुरपुर जट एग्जाम सेंटर से कथित तौर पर प्रश्न पत्र के तीन पेज बाहर आ जाने का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर पूरे प्रदेश में विवाद और आक्रोश का माहौल बन गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया: “यह पेपर लीक नहीं, नकल का मामला है”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रकरण को पेपर लीक मानने से इनकार किया है। उन्होंने कहा:
“अगर पेपर 9 बजे, 10 बजे या 10:30 बजे बाहर आया होता, तो हम इसे पेपर लीक मानते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह नकल का मामला हो सकता है। हमने नकल पर सख्त कानून बनाया है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।”
मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि किसी के पास प्रश्न पत्र के अंश पहुंचे थे, तो उसे तुरंत पुलिस या प्रशासन को सूचना देनी चाहिए थी, लेकिन कई घंटे तक इसे छुपाया गया और फिर सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाकर पूरे सिस्टम को बदनाम करने की कोशिश की गई।
पेपर बाहर कैसे आया?
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परीक्षा सुबह 11 बजे शुरू हुई थी।
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आरोप है कि कमरा नंबर 9, 17 और 18 में जैमर नहीं लगे थे।
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इन्हीं कमरों में से एक में बैठा मुख्य आरोपी खालिद, जो स्वयं परीक्षार्थी था, इंविजिलेटर की अनुमति से वॉशरूम गया।
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खालिद प्रश्न पत्र अपने साथ वॉशरूम ले गया और वहां से प्रश्न पत्र के 3 पन्नों की तस्वीरें खींचीं।
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उसने ये तस्वीरें अपनी बहन साबिया को भेजीं।
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साबिया ने ये तस्वीरें असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को भेजीं और उत्तर प्राप्त किए।
मामला कैसे सामने आया?
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प्रोफेसर सुमन ने पुलिस को सूचना देने के बजाय उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार को यह जानकारी दी।
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इसके बाद पंवार ने इस घटना को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिससे पूरे प्रदेश में हंगामा मच गया।
अब तक की कार्रवाई
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मुख्य आरोपी खालिद और उसकी बहन साबिया गिरफ्तार।
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प्रोफेसर सुमन को निलंबित किया गया।
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परीक्षा केंद्र की निगरानी में लापरवाही पर जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक केएन तिवारी को निलंबित किया गया।
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हरिद्वार एसएसपी ने एक दारोगा और एक अन्य पुलिसकर्मी को निलंबित किया।
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खालिद का मोबाइल अब तक नहीं मिला, जिससे अभी भी कई राज खुलने बाकी हैं।
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
धामी ने साफ किया कि राज्य सरकार नकल के मामलों पर सख्त कानून बना चुकी है और इस केस में भी किसी को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सूचना को तत्काल साझा करने के बजाय सोशल मीडिया पर फैलाने का एजेंडा क्या था?
बड़ा सवाल: पेपर लीक या सिस्टम फेलियर?
यह घटना सिर्फ परीक्षा की पवित्रता पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि यह भी दर्शाती है कि तकनीकी इंतज़ाम जैसे जैमर न लगना और निगरानी की कमी से किस तरह सिस्टम की चूक होती है।
हालांकि मुख्यमंत्री ने इसे पेपर लीक मानने से इनकार किया है, लेकिन परीक्षा केंद्र की लापरवाही, पेपर के बाहर जाने का तरीका और सूचना छुपाने की साज़िश गंभीर चिंता का विषय है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह जांच केवल नकल के आरोपियों तक सीमित रहती है या फिर व्यापक पेपर लीक नेटवर्क की भी परतें खुलती हैं।




