उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहेंगे प्रदेश के युवा, डिजिटल गवर्नेंस और रोजगार के नए अवसर बने
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देहरादून। उत्तराखंड में राज्य गठन के बाद उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति भी दर्ज की गई है। प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में कॉलेज स्थापित होने से अब कोई युवा उच्च शिक्षा से वंचित भी नहीं रहेगा। बीते 25 वर्षों में शिक्षा को डिग्री तक सीमित न रखकर उसे रोजगार, उद्यमिता व नवाचार से जोड़ा गया है।
राज्य में अब 11 राजकीय विश्वविद्यालय और 118 महाविद्यालय संचालित हैं, जबकि 31 निजी विश्वविद्यालय भी शिक्षा के क्षेत्र में योगदान भी दे रहे हैं। छात्रों की संख्या बढ़कर 5 लाख तक पहुंच गई है, जिसमें 60 प्रतिशत छात्राएं भी हैं।
सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं से लैस भी किया है। कुमाऊं विश्वविद्यालय को ‘मेरु’ के रूप में विकसित भी किया जा रहा है। वहीं, शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए IISc, IIM काशीपुर व Infosys Springboard जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्यक्रम चल रहे हैं।
डिजिटल गवर्नेंस के तहत समर्थ पोर्टल से प्रवेश, परीक्षा व छात्रवृत्ति की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। छात्रों को वर्चुअल लैब, स्किल डेवलपमेंट व स्टार्टअप योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है शिक्षा को जीवन, रोजगार व समाज से जोड़ना—ताकि युवा न सिर्फ शिक्षित, बल्कि आत्मनिर्भर बनें।




