उत्तराखंड

इस साल वनाग्नि से मिली राहत, लेकिन मानसून में उखड़े पेड़ों ने बढ़ाया नुकसान, गिनती शुरू

मानसून और नदियों के उफान से वन संपदा को भारी नुकसान, वनाग्नि का खतरा बना हुआ


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देहरादून: उत्तराखंड में हर वर्ष वनाग्नि व प्राकृतिक आपदाओं के कारण जंगल और वन संपदा को गंभीर नुकसान भी पहुंचता है। गर्मियों में इस वर्ष वनाग्नि से कुछ राहत मिली थी, लेकिन मानसून में हुई लगातार बारिश व नदियों के उफान ने जंगलों को बुरी तरह प्रभावित भी किया है।

नदियों और गदेरों ने जंगल उजाड़ा

मानसून में नदियों और गदेरों ने भू-कटाव कर जंगल के कई हिस्सों को बहा भी दिया। इसमें पैदल मार्ग, अश्व मार्ग व वन मोटर मार्ग सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। प्लांटेशन के तहत लगाए गए पौधों को भी नुकसान हुआ और कई पेड़ उखड़कर भी गिर गए।

उत्तरकाशी के धराली व हर्षिल के आरक्षित वन क्षेत्र में करीब 100 से 120 हेक्टेयर जंगल प्रभावित भी हुआ। वन विभाग अब नुकसान का स्थलीय निरीक्षण और वृक्षों की गिनती करने में भी जुट गया है।

मानसून के बाद वन विभाग की स्थिति

वनाग्नि का सीजन शुरू होने पर वन विभाग की निगाहें हमेशा आसमान पर भी टिक जाती हैं। बारिश आने तक ही जंगल की आग पर काबू पाया भी जा सकता है। इस बार लगातार हुई बारिश से तुलनात्मक रूप से वनाग्नि कम रही, लेकिन जुलाई से सितंबर तक हुई भारी बारिश ने कई स्थानों पर वन क्षेत्र और बुनियादी ढांचे को नुकसान भी पहुँचाया।

  • वन मोटर मार्ग, पैदल व अश्व मार्ग क्षतिग्रस्त हुए
  • वन चौकियां, रेंज कार्यालय, आवास व जलाशय प्रभावित हुए
  • प्लांटेशन के पौधे बर्बाद हुए, चैक डैम व पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई

प्रभावित क्षेत्रों का विवरण

  • तराई केंद्रीय वन प्रभाग (रुद्रपुर रेंज): जलभराव से पौधरोपण को नुकसान
  • चंपावत वन प्रभाग (बूम रेंज): रुद्राक्ष पौधे नष्ट
  • तराई पश्चिम वन प्रभाग (बन्नाखेड़ा रेंज): चूनाखान नाले से भारी कटाव
  • जौलासाल रेंज: कालेरिया नदी का उफान, जैव विविधता प्रभावित
  • गड़प्पू: बौर नदी के कारण भू-कटाव

डीएफओ हरिद्वार स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि श्यामपुर व चिड़ियापुर रेंज के वन और वन मोटर मार्ग को नुकसान भी हुआ है।

उत्तरकाशी में 120 हेक्टेयर आरक्षित वन प्रभावित

उत्तरकाशी के धराली, हर्षिल व यमुनाघाटी में आई आपदा के कारण वन संपदा को भारी क्षति पहुंची। गंगोत्री रेंज अधिकारी यशवंत चौहान ने बताया कि लगभग 1500 से 1800 छोटे-बड़े पेड़ भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। यह केवल प्रारंभिक आकलन है, विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही तैयार की जाएगी।

जिलेवार वन क्षेत्र (2023, वर्ग किमी)

जिला अति घना मध्यम घना खुले वन कुल वन क्षेत्र वन क्षेत्र %
अल्मोड़ा 262.24 817.89 642.83 1,722.96 54.80%
बागेश्वर 267.75 741.21 676.42 1,685.38 56.38%
चम्पावत 342.65 1,521.23 1,264.31 3,128.19 59.06%
चमोली 427.59 1,512.13 1,219.30 3,158.93 33.89%
देहरादून 588.94 1,849.84 1,364.50 3,803.28 59.06%
हरिद्वार 86.49 582.96 360.45 1,029.90 36.12%
नैनीताल 780.03 1,524.17 866.55 3,170.75 53.12%
पौड़ी 580.49 1,243.32 926.55 2,750.36 69.06%
पिथौरागढ़ 586.44 1,184.94 892.47 2,663.85 67.93%
रुद्रप्रयाग 272.76 582.17 286.35 1,141.28 51.79%
टिहरी 305.87 1,149.08 708.18 2,162.13 61.03%
यूएसनगर 157.69 216.42 120.06 494.17 19.44%
उत्तरकाशी 816.81 1,251.63 651.96 2,720.40 45.44%
  • नोट: आंकड़े भारतीय वन सर्वेक्षण 2023 के अनुसार हैं।

वनावरण में हल्की गिरावट

  • 2021: 24,305.13 वर्ग किमी
  • 2023: 24,303.83 वर्ग किमी
  • कमी: 1.3 वर्ग किमी

वन विभाग अब नुकसान की स्थलीय जांच व पुनर्स्थापना कार्यों में जुटा है, ताकि वन संपदा और जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


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